कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 898, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंएक धनभण्डार दिखा दिया। उसने देखा कि भण्डार धनसे परिपूर्ण है, कुम्हारसे जितना धन उठाया गया उठा लिया फिर अजगरने कुम्हारको उसी स्थान पर पहुँचा दिया, कुम्हार कुशल पूर्वक अपने घर पहुँच गया।
भैंसके थनको पीनेवाला—फिरोजपुर जिलाके भागसर मौजेके समीप तालाबके किनारेके बिलमें एक सोंप रहा करता था। वह भैंसके बच्चे कीसी आवाज किया करता था। जब कोई भैंस उस तालाबमें गिरे तो वह जाकर भैंसकी पिछली टाँगोंमें लपटकर उसके दूधको भली प्रकार चूस परितृप्त होकर ही पृथक् होता था।
मोटा छोटेमें—इसी पुस्तकमें लिखा है कि, एक स्त्री बहुत बड़ा सर्प देखकर चिल्लाने लगी। लोग दौड़े सोंपको मारनेके लिये पत्थर उठाया। सोंप भागकर एक कोनेमें छिप गया, लोगोंने बहुत दृढ़ता पर उसका पता न मिला। एक स्थानपर एक छोटा बिल दिखाई दिया। लोग आश्चर्य करने लगे कि, इतने छोटे बिलमें इतना बड़ा तथा मोटा सोंप कैसे समा गया? सोंप मनुष्योंको काटा नहीं चाहते, बड़े उदार प्रकृतिके होते हैं पर जब मनुष्य उसे मारनेको घेरते हैं तो भूमि उसको जगह देती है अत्यन्त छोटे बिलमें भी बड़ा सोंप समा जाता है।
रागसे प्रेम—सोंपोंको राग तथा बाजेसे बहुत प्रेम होता है। जहाँ कहीं अच्छा राग अच्छा बाजा हो वहाँ जाकर सुनते हुए प्रसन्न होते हैं मस्तीमें अपनी दुमपर खड़े होकर नाचते हैं।
एक मनुष्यने सर्पका शिर सावधानीसे पकड़ लिया उसको कोई उपाय न दिखाई दिया। सोंपने बहुत जोरसे हाथको कसा। जब नसोंपर जोर पड़ा तो वे दब गईं, उस मनुष्यकी मुट्ठी आपसे आप खुल गई सोंपका शिर छूट गया। उसने उस मनुष्यको काट खाया। मनुष्य मर गया सोंप चला गया उस मनुष्यकी कोई भी युक्ति काम न आई।
शत्रुको मरानेवाला—एक मनुष्य कहीं चला जाता था। राहमें उसको सोंपने घेर लिया। वह मनुष्य जिधर जाता था उधरही फुंफकार मारकर खड़ा हो जाता था पर चोट न करता था। मनुष्यने देखा कि, सोंप मुझे कष्ट पहुँचाना नहीं चाहता बरन् पथ रोकता है। उसने सोंपसे कहा कि, तू क्या चाहता है? इतना कहतेही सोंप एक ओर चला वह मनुष्य उसके ईशारेको समझकर उसके पीछे हो लिया। थोड़ी दूर पर वे दोनों एक मैदानमें गये, वहाँ पहुँचतेही सोंप एक प्रकारका शब्द करने लगा जिसके सुननेसे दूसरा सोंप बाँबीमेंसे निकल उसके साथ लड़ने लगा। वह मनुष्य समझ गया कि, यह सोंप इसका वैरो है