भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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प्राकृतिक उपचारोंको न सह सकेंगे । अपने अपने चोलामें सुखी—सब जीवधारियोंको अपना २ चोला प्यारा लगता है । कोई नहीं चाहता कि, मेरा शरीर नष्ट हो जाय यहाँतक कि, विष्ठाके कीड़ेको भी अपना शरीर प्यारा लगता है वह भी मरना नहीं चाहता । उदाहरण—एकवार नारद महाराजने विष्णु भगवान्से पूछा कि, आपने जीवोंमें उत्तम मध्यम और अधम भेद क्यों किया है ? आप तो दयालु हैं, आपको सबको सम भावसे सुख देना चाहिये । यह सुन भगवान्ने उत्तर दिया कि, मैं स्वतः किसीको सुख दुःख नहीं देता किन्तु जीवोंकी इच्छाके अनुसार वैसीही व्यवस्था कर देता हूँ यदि कोई भी दुःखमें हो तो पूछ लो नारदजी उसी जीवोंको देखते हुए भूमिपर आये कीचके गढ़ढेमें सूकरको पड़ा देखकर उससे कहने लगे कि, तू क्यों कष्ट पा रहा है ? स्वर्ग चल, नारदजीने उसके सामने स्वर्गके सुखोंका वर्णन किया । उसने पूछा कि, वहाँ कीचड़ है वा नहीं ? क्योंकि मुझे यह कीचड़ अत्यन्त प्यारी है यह पूछकर फिर भी सूकरने कहा कि, स्वर्गमें विष्ठा है कि नहीं ? (क्योंकि, शूकर विष्ठा खाता है) नारदजीने कहा ये सब पदार्थ वहाँ कहाँ ? यह बात सुनकर शूकरने कहा कि, मैं तुम्हारे स्वर्गमें नहीं जाना चाहता, मैं यहाँही रहूँगा तुम्हारा स्वर्ग तुम्हारे लिये सदा रहो । इस विषयपर महात्माओंका एक दोहा भी है कि—

कलयुगी संत चले वैकुण्ठको, चढ़े पालकी माहिं ।

वीच राहसे फिर आयै, वहाँ भंग तमाखूँ नाहिं ॥

जो जीवधारी जिस दशामें हैं, उसी हालतमें उसकी रक्षा करनेवाला भगवान् उसके साथ मैं है, वहाँ उसकी कठिनाताको दूर करता है तथा उसी अवस्थामें उसको सुख पहुँचाता है ।

बालककी रक्षा—हिन्दुस्थानका सिपाही रास्तेमें चला जाता था, उसकी स्त्री गर्भवती थी, उसने मार्गमेंही पुत्र प्रसव किया, आप मर गई । जीवित पुत्रको देखकर सिपाही चिन्ता करने लगा कि, इस पुत्रको मैं किस प्रकार पालूंगा ? जब उसे कोई उपाय न सूझा तो गड़हा खोदकर अपनी मृतक स्त्रीको लेटा दिया उसकी छातीपर बच्चेको रख इधर उधरसे बूझोंकी डालियाँ और काँटे वगैरः लेकर उस गड़हे पर इस प्रकारसे रख दिया कि, जिसमें लड़केको किसी प्रकारका कष्ट न पहुँचे । पीछे अपनी नौकरीको चला गया । कुछ दिनोंके बाद छुट्टी लेकर वह अपने घर जाने लगा, उसी रास्तेसे आया, वहाँ जाकर देखा तो बच्चा बाहर खेल रहा है । गड़हेके अन्दर देखा तो उसकी स्त्रीका सर्व अङ्ग तो गल गया था पर स्तन उसी प्रकार रहे वह बच्चा उन्हें ही चूसता करता था, बच्चेने मनुष्य-