भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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को आते देखा, तो डरकर गड़हेमें भाग गया। इस मनुष्यने उस बच्चेको गोदमें उठा लिया। बच्चा रोने व चिल्लाने लगा। सिपाहीने मिठाई वगैरः खिलाकर उसको बहुत धीरज दिया उसे लेकर अपने घर आया। धन्य है सर्वशक्तिमान् सर्व रक्षक दयालु परमात्माको जो इस प्रकार रक्षा करता है।

बनी इसराईलकी रक्षा—इस बातमें कोई आश्चर्य न करे। बाइबुलमें लिखा है कि, बनी इसराईल चालीस वर्षतक जड़लोंमें फिरते रहे, उनके पाँवके न जूते टूटे और न कपड़े फटे उनके बच्चे उत्पन्न होते थे पेटसे ही जामा पहरे निकलते थे ज्यों वे बड़े होते थे, त्यों त्यों उनका जामा भी बढ़ता जाता था। आकाशसे उनके लिये भोजन उत्तरता था, खुदा उनके साथ रहता था उनकी रक्षा किया करता एवं वही उनकी आवश्यकताको पूरा किया करता था।

कीड़ेकी रक्षा—तीन चार वर्ष हुए। एक सिकख पहाड़पर चला गया, वहां उसके पास रसोई बनानेको कोई बरतन न था। वह एक झरना पर गया, एक पत्थर पर आटा गूंधा, एक पत्थरका तावा बनाया, दो पत्थर जोड़कर चूल्हा बनाया रोटी पकाने लगा। पत्थर आगसे गरम हो गया पर दो अंगुल गरम नहीं हुआ, इसी प्रकार नित्य होने लगा। पत्थरका जो भाग गरम नहीं होता, उतने भागमें रोटी भी कच्ची रह जाती। सिकख आश्चर्यमें था कि, क्या कारण है कि, समस्त पत्थर गरम होता है पर इतना भाग गरम नहीं होता। संयोगसे एक दिन वह तावावाला पत्थर टूट गया उसमें जितनी जगह ठंडी रह जाती थी उसमें से एक कीड़ा निकल पड़ा। देखो परमात्माकी कृपालुता, किस प्रकारसे उस कीड़ेकी पालना करते हुए उसकी जान बचा दी।

मंजारीके बच्चे—हिरण्यकश्यप दैत्य अपने पुत्र प्रह्लादको मारनेके विचारमें था। प्रह्लादने कौतुक देखा था कि, एक कुम्हार अपने आवामेंसे बरतनोंको निकाल रहा है बरतन निकालते निकालते एक जगह देखा कि, बरतन ज्योंके त्यों कच्चे रह गये, उनमें तनिक भी आँच नहीं लगी उन बरतनोंको हटाने पर नीचे बिल्लीके कई बच्चे निकले। यह बात इस प्रकार हुई थी कि, जब कुम्हार बरतनोंका आवा लगा रहा था उसी समय बिल्ली आई बच्चा देकर कहीं बाहर चली गई, इतनेहीमें कुम्हारने अज्ञानतासे आवामें आग लगा दी।

यह घटना देखकर प्रह्लादको पूरा निश्चय हो गया कि, जिस प्रकार सर्वरक्षक प्रभुने बिल्लीके बच्चोंकी जान बचाई है वही मेरी भी रक्षा करेगा। परमात्माने मनुष्यको हाथ पाँव दिये हैं जिससे वह अपना काम करे, परिश्रमसे पेट भरे, वस्त्र पहने आवश्यकताओंको पूरा करे, किसी दूसरेका आसरा न करे।