भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 984

शतं समा यः पुरुषः तपस्तेषु सुदारुणम् ।

न भक्षयन्ति ये मांसं सममेतदुदाहृतम् ।

अर्थ—जो सौ वर्ष अथवा उससे भी अधिक तपस्या करे, दूसरा मांसका निरंतर त्यागी ही दोनोंका एक समान फल है ।

यथा हृस्तिपदे यानि पदानि पदगामिनः ।

सर्वे धर्मास्त्वहिंसायां प्रविशन्ति तथा ध्रुवम् ॥ १ ॥

सर्ववेदाधिगमनं सर्वतीर्थविगाहनम् ।

सर्वयज्ञफलं चैव नैव तुल्यमहिंसया ॥ २ ॥

अहिंसा परमो यज्ञो अहिंसा परमं तपः ।

अहिंसा परमाक्षय्यमहिंसो यजते सदा ॥ ३ ॥

अहिंसा सर्वलोकस्य यथा माता पिता तथा ।

स्वमांसात्परमांसानि परिपाल्य दिवं गतः ॥ ४ ॥

तमेव परमं धर्ममहिंसां संप्रचक्षते ।

एवं परो महात्मा यो विष्णुलोकं स गच्छति ॥ ५ ॥

अर्थ—जैसे सब जीवधारियोंके पग हाथीके पगमें आजाते हैं उसी प्रकार अहिंसामें सर्वे धर्म समा जाते हैं ॥ १ ॥ अहिंसा अर्थात् किसी भी जीवधारियोंको दुःख न देना ही वेद पाठ है, तीर्थटन है, सर्वे यज्ञ, है, जीवधारियोंकी रक्षाके तुल्य कोई धर्म नहीं है ॥ २ ॥ अहिंसा परम यज्ञ है, जो हिंसा नहीं करता है वह यज्ञ और तप करता है ॥ ३ ॥ जो कोई जीव हिंसा नहीं करता, वह सबका ऐसा प्यारा होता है जैसे कि, माता पिता । जो अपने प्राणका लालच छोड़कर, अपना मांस देकर बच्चेकी जान बचाते हैं ऐसे परोपकारी लोग स्वर्ग जाते हैं ॥ ४ ॥ जिसमें जीव हिंसा न हो वही धर्म बड़ा है जो लोग इस धर्मको धारण करते हैं वे महात्मा लोग विष्णु लोकको चले जायेंगे ।

जग जाओ ।

आकाश और विष्णु सत्तोगुण रूप हैं, पृथिवी, और ब्रह्मा रजोगुण रूप हैं, पाताल और शिव तमोगुण रूप हैं । फारसीमें इनको तमीज शहवत और गजब कहते हैं । जो कोई सत्तोगुणका आश्रय करता है वह देवता है, जिसमें सत्तोगुण और रजोगुण हो वह मनुष्य है, जिसमें रजोगुण और तमोगुण हो वह राक्षस तथा नारकी जीव है, सत्तोगुण ऊपरको रजोगुण पृथिवीमें और तमोगुण नरकमें डालेगा । मांस खाना तमोगुणी है, अवश्य नरक ले जावेगा जीवकी जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति ये तीन अवस्था हैं, जाग्रत अवस्था मनुष्यकी, स्वप्न पशुकी