कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
( १५१ )
पीठी १६
सोरह वंश कला अधिकारी। सत्तर ७० कडिहार शब्द उजियारी॥ चौंसठ हजार पांचसै बारा। ६४५१२। इतने हंस सब उतरे पारा॥
पीठी १७
सत्रह वंश अंशकी बानी। असी कडिहार तिन्हकी परमानी ॥ छिहत्तर सहस्र पांचसै तीसा। ७६५३०। धर्मदास कुल आदिसदीसा
पीठी १८
वंश अठरहे नवे कडिहारा। असी हजार हंस लै उतरे पारा ॥ ८००००० तब कलियुगकी दसी मिटाई। वंश अंश प्रगटे अधिकाई ॥
पीठी १९
उन्निस वंश अंश अधिकारा। एकसै सात तिन्हके कडिहारा ॥ छानवे हजार सातसै दोई। ९६७०२। इतने हंस लोकको होई ॥
पीठी २०
बीसो वंश अंशकी बानी। एकसौ तेरह कडिहार बखानी ॥ लाख एक औ बीस हजार। पांचसै हंस ज्योति निर्धारा ॥ ॥ १२०५०० ॥
पीठी २१
वंश एकसौ जग चलि आई। एकसौ तीस कडिहार अधिकाई ॥ १३० लाख दोय और तीस हजार। छःसे अंश जो पांच अधिकारा ॥ ॥ २३०६०५ ॥
पीठी २२
वंश बावीसे दोय सौ कडिहारा २००। तीन लाख और चालिस हजारा। सातसौ अंस जो बीस अधिकारा ॥ ३४०७२० ॥ जाग्रत बंस करे कडिहारा ॥