कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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कबीरबानी
पीढी २३
तेहस वंश अंशका बानी । दोईसै तेरा कडिहारा जो जानी २१३॥ तीन लाख और तीस हजार । इतने हंस जो पांच अधिकारा ॥ ३३०००५ ॥
पीढी २४
चौवीसे वंश अंश जग आवै । तीनसे कडिहार बीसते पावै ॥
पीढी २५
लाख चारि जो तीस हजार । चालिस हंस पहुँचे दरबारा ॥ वंश पचीसे तीनसे छप्पन कडिहारा । लाख पांच हंस भयो पारा ॥
पीढी २६
छबीसौ वंश चारसौ कडिहारा । लाख पांच और तीन हजार ॥ नबसै सत्तर हंस उबारा ॥ ५०३९७० ॥ इतना मर्म हंसको जानी । सब मंडल अटले रजधानी ॥
पीढी २७
सत्ताविस वंश अंश अधिकारी । छःसो हंस करै कडिहारी ॥ ६०० ॥ सात लाख छानवै हजार । सातसै पैसठ हंसनिर्धारा ॥ ७९६७६५
पीढी २८
वंश अठाविस जाग्रत होई । पांचसौ कडिहार जो पंद्ररा सोई ॥ ५१५ ॥ लाख चारि जो बीस करोरी । पैतिस हजार तीन सौ कोरी ॥ ॥ २००४३५३०० ॥
पीढी २९
उनतिस वंश मंडल उनचासा ॥ सातसै तीस कडिहार प्रकाशा ॥ ७३० ॥ तीस करोर लाख है सोरा । साठ हजार सात सौ तेरा ॥ ॥ ३०१६६०७१३ ॥