भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बोधसागर

चाके देवता वायु ८, नाकके देवता अश्वनीकुमार ९, जीभके देवता वरुण १०, हाथके देवता इंद्र ११, पाँवके देवता उपेन्द्र १२, लिंगके देवता प्रजापति १३, गुदाके देवता यम १४ । मुक्ति सालोक इति स्थूलदेही विस्तार ।

अथ सूक्ष्म देहीका वर्णन

लिंगदेही अंगुष्ठ बराबर ओंकार मात्रका श्वेत वर्ण विष्णु देवता स्वप्न अवस्था श्रीहटस्थान मध्यमा बाचा उर्ध्व सैन्य दीर्घ-मात्रका यजुर्वेद वैकुण्ठलोक कण्ठस्थान पालनक्रिया आप तत्त्व भूचरी मुद्रा विहंगमार्ग दुतिया पद गायत्री अक्षर निर्णय मन्दा किनी कोहं अहंकार सामीप्य मुक्ति पंचभूत सूक्ष्म प्राण अपान समान उदान व्यान चतुष्टय अन्तःकरण मन बुद्धि चित्त अहंकार शब्द स्पर्श रूप रस गंध ये सूक्ष्म नौ तत्त्व कहिये, पंच ज्ञान इन्द्री पंच कर्म इन्द्री ये सब जड़ हैं; जीव प्रतापते चैतन्य होते हैं तासे जाव कहते हैं इति लिंग ।

अथ कारण देहीका वर्णन--वार्ता

कारण देही अर्ध पर्व श्याम बरण मकार मात्राका गोलहट स्थान वैसन्ती बाचा मध्य शून्य तमो गुणसामवेद चाचरी मुद्रा कपिमार्ग महदाकाश हृदयस्थान पराग्य अभिमान कंठ स्थान निर्णय उदायाग्नि तृतीया पद गायत्री अद्वैतानन्द नवीन इच्छा शक्ति सुषुप्ति अवस्था सारूपमुक्ति इति कारण देही ।

अथ महाकारण देहीका वर्णन

महा कारण देही मसूर बराबर विकार मात्रका नील वरण ईश्वर देवता हुंठ पीठ स्थान पराबाचा शून्य अर्धमात्रका अथर्वण वेद वायुतत्त्व अगोचरी मुद्रा । ज्वाला कालामीनमार्ग चिदाकाश आद्वैलोक नाभी स्थान प्रतिज्ञा विष्णु अभिमानी