भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

पृष्ठ 1459, कुल 2136 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1459

स्वसप्तमवेदबोध

( ८३ )

षट् देही वर्णन करो, समझिके त्यागो मित । एक एक अब कहत हौं, जिहि प्रकार जिहि मित ॥

इति

अथ स्थूल देही वर्णन--वार्ता

स्थूल देही साढ़े तीन हाथ रक्तवरण ब्रह्मा देवता रजो गुण ॐकार मात्राका जाग्रत अवस्था बैसरी वाचा त्रिकुटी अस्थान जल तत्त्व खेचरी मुद्रा पपील मार्ग घटाकाश नेत्रस्थान सत्य- लोक विश्व अभिमानी गायत्री प्रथम पद क्षर निर्णय बङ्गवाअग्नी विषयानन्दादिक आपतत्त्व दश इन्द्री रहस मात्रका अर्थ सत्र ऋग्वेद चौदह देवता पचीस प्रकृति । इति ।

पचीस प्रकृति वर्णन

( १ ) आकाशकी प्रकृति-काम १, कोध २, लोभ ३, मोह ४, भय ५, रंग काला अहार शब्दद्वारा कान इति । ( २ ) वायुकी प्रकृति-चलना १, बोलना २, बल करना ३, पसारना ४, संकोचना ५. रंग हरा अहार गंध द्वारा नासिका इति । ( ३ ) अग्निकी प्रकृति-नींद १, जमुहार्द २, भ्रूख ३, प्यास ४, आलस ५. रंग लाल अहार देखनो द्वारा आंख । ( ४ ) जलकी प्रकृति-रक्त १, पसीना २, थूक ३, मृत ४, विद ५. रंग श्वेत अहार मैथुन द्वारा लिंग इति । ( ५ ) पृथ्वी प्रकृति- हाड १, मांस २, नाडी ३, चाम ४, रोम ५. रंग पीला द्वारा गुदा इति पचीस प्रकृति ।

चौदह देवताके नाम

मनके देवता चन्द्रमा १, बुद्धिके देवता ब्रह्मा २, चित्तके देवता नारायण ३, अहंकारके देवता शंकर ४, नेत्रके देवता सूर्य ५, कानके देवता दिशा ६, वाचाके देवता अग्नि ७, त्व-