कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1751, कुल 2136 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयमनिगमबोध
( २९ )
अथ शिवसम्प्रदायको धामक्षेत्र वर्णन-वार्ता
विष्णुकांची धर्मशालामार्कडेयक्षेत्र इन्द्रधनु सुख विलास पुरुषो- तम धाम लक्ष्मी इष्ट जगन्नाथ उपासी तुलसी मंत्र त्रिपुरारि शाखा वामदेव आचार्य सायुज्य मुक्ती नेत्रद्वारा हरिनाम अहार यजुर्वेद अच्युत गोत्र शुक्ल वर्ण बट कृष्ण परिक्रमा जलबिंदु ऋषि नारद देवता विष्णुश्याम वैष्णव ।
इति
अथ ब्रह्मसंप्रदायवर्णन चौपाई
कह अब तृतीय सम्प्रदा सोई । ब्रह्मा आदि अचारय होई ॥ आदि काल नारायण देवा । ब्रह्मासे भाषे यह सेवा ॥ यहि सम्प्रदा आचार्य सयाना । भये माधवानंद प्रधाना ॥ मै सम्प्रदा विदित तिहि नाऊ । माधवाचार्य गहे भल भाऊ ॥ कांचि पुरीके पश्चिम दक्षिण । द्विज कुलमें औतार गहे तिन ॥ द्वैताद्वैत धर्म निज केरे । ईश्वर निज मायाको प्रेरे ॥ तब यहि जगकी रचना होई । ईश्वर भिन्न मिला पुनि सोई ॥ गुरु पीठी अब कहो बखानी । आदि अचारय सारंगपानी ॥ द्वितियेब्रह्मा तृतिये नारद । चौथे व्यास जो बुद्धि विशारद ॥ सुबुधा चार्य नरहरा चारय । सप्तम कहै माधवा चारय ॥ माधवाचारजते लेख उचारा । पूर्नानन्द लो वंश अठारा ॥
इति
अथ ब्रह्मसंप्रदायके धामक्षेत्र वर्णन-वार्ता
अवंतिका पुरी धर्मशाला बद्रिकाश्रम धामा नैमिषारण्य सुख- विलास अङ्गपात्रक्षेत्र सावित्री इष्ट ब्रह्मोपासी विष्णु हंस मंत्र हंस देवता सालोक मुक्ति मोक्ष द्वारा स्त्री कालाचार्य अद्वैत शाखा