कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर
तृतीय नेत्र दोउ कंठपुनि, उर नाभी फिर होय ॥ उर दोहु दिश भुज दोय पुनि, तथा पूष्ट परमान । बरन बइणवके यही, द्वादश तिलक बखान ॥
इति द्वादश तिलक
अथ वैष्णवके दशचिन्ह वर्णन
दोहा-भद्र भेषतशोचकर पुनि, तुलसी गल माथ । रामकृष्णको मंत्र गह, गोपी मृतिका साथ ॥ शिखा सूत्र करमण्डलो, धौत वस्त्र गुरुवाक । चिह्न वैष्णवके दशो, चार संप्रदा साक ॥
इति
अथ बावनद्वारेके नाम
दोहा-प्रथम अनंता जी कहे, साहिब सत्य कबीर । पुनि सुरेश्वरानंदजी, सुखानन्द मति धीर ॥ अनभय नन्द सुरारजी, अग्रदासजी काल । दीपाजी रवि दासजी, नामदेव हृदशील ॥ खोजी जंग दिवाकर, वीरम त्यागी जान । परशराम नाभा टिला, भोला नैन बखान ॥ पूरन बैराटी कहे, बहुरि घमण्डी देव । ज्ञानिकुबा हरि बंशजी, राधावा वस्त्रभ येव ॥ गोकुल विटुल करम चँद, जोगानंदी जोय । धरनीदास मल्लकजी, असख देवनी होय ॥ माधौ कानी रामरावल, आत्माराम प्रकाश । लाल तरंगी देव भंडंग, भगवान तुलसीदास ॥ हठी नरायण राम रँगी, चतुरा नागा होय । नित्यानन्दी राम कबीर, श्यामानन्दी सोय ॥