भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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आगमनिगम बोध

( ३३ )

हनुमान दास कमालजी, चेतन स्वामी नाम । दास चतुर्भुज राम जपु, मन पुनि कह दुंदराम ॥

इति बावनद्वार

अथ सात अखाडनके नाम

दोहा-टाटंबी निरालंबी कह, संतोषी विरुध्यात । निर्वानी दीगम्बरी, पोकी निरमोहि सात ॥

इति सात अखाडन

अथ तेरह परमभागवतके नाम-चौपाई

नारद पुंडरीक प्रहलादा । ग्यास वशिष्ठ पराशर वादा ॥ भीषम रुक्मांगद विभीषनौ । अर्जुन अम्बरीष शुक् सेनौ ॥

इति

अथ रामानन्दजी और सत्यकवीरकी कथा-चौपाई

सत्यकवीर मनुष तन लीने । जोलहाके घर बासा कीने ॥ अगम ज्ञान कथ साधुन पाही । सुनि आश्चर्य करे मनमाही ॥ निजु निजु मनमें करे बिचारा । बालक नहीं सिद्ध औतारा ॥

सत्यकवीर वचन शब्द

साखी-तब हम साध सिद्धते, कथे गुष्ठि घन ज्ञान । सिद्ध साध मिलिमोकह, पूछै गुरुको नाम ॥

चौपाई

गुरु नहिं नाम कहौ क्यों ओही । तब वे दोष देहि सब मोही ॥ साकठ होई कथ्यो बहु ज्ञाना । गुरुविन मुक्ति नहोय निदाना ॥ तब अपने मन कीन बिचारा । तब गुरु उठो द्वंद संसारा ॥ हम गुरुमुक्ति हटावन आये । गुरुमारग जिवलोक पठाये ॥ गुरु धारनको मनहिं बिचारा । रामानंदसे वचन उचारा ॥ रामानन्द गुरु दिशा दीजै । गुरुपूजा कछु हमसे लीजै ॥