भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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सुमिरनबोध

( २९ )

अंशनके नाम

प्रथम अचित्य, दूसरे जोहेंग, तीसरे अकह, चौथे सुकृत, पांचे हिरण्यमय, छठे अक्षर, साते योगमाया, आठे निरंजन, अचिन्तको चिन्ता नहीं, तेज अण्डके मालक, प्रवान, पालंग १२ वंश ॥१॥ प्रथम माया, दूसरे कूर्म तिसरे अदल अष्ट, चौथे निरञ्जन, पांचे नभ, छठे समीर, साते तेज, आठे नीर, नवे पृथ्वी ॥ ९ ॥ दूसरे जो अङ्ग हंस, तिनको बैठक धीरज अण्ड दिये अण्डको प्रवान पालंग पचीस ॥ २५ ॥ और वंश सोरह ॥१६॥

वंशनके नाम

प्रथम अजरमुनि, दूसरे अगममुनि, तीसरे हंसमुनि, चौथे चन्द्र मुनि, पांचे आपमुनि, छठये पुरुषमुनि, सातें अलंजित मुनि आठे कलंक मुनि, नवें शीतलमुनि, दशयें श्री मुनि, ग्यारहे कण्ठमुनि बारहें कनक मुनि, तेरहे बेहंग मुनि, चौदहे गंगमुनि, पन्द्रहहे सोम मुनि, सोरहे जलरंग ॥ १६ ॥

तीसरे अकहअंश

तिनको बैठक छिमा अण्डभो दिया, अण्डको प्रवान व्यालिस ॥ ४२ ॥ वंश सताईस ॥ २७ ॥

वंशके नाम

प्रथम प्रेम, दूजे हुलास, तिसरे आनन्द चौथे विशाष, पांच हेत छठे प्रीति, साते निरख, आठे विवेक, नवें सुमत, दशें क्षमा, ग्यारहें धीरज, बारहें आलहाद, तेरहें शील, चौदहें संतोष, पन्द्रहहें सुमन, सोरहें बुद्धि सत्रहें भाव, अठारहें भक्ती, उन्नीसवें दया, बीसे ज्ञान, एकइसे किया, बाईसे विचार, तेइसे कृपानि, चौबिसे संतोष पचीसे भेद, छबीसे इच्छा, सताइसे भय, तिनको राज्य क्षमा अण्ड पुरुषके हजूरी ॥

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