भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

पृष्ठ 1839, कुल 2136 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1839

सुमिरनबोध

( ३३ )

चार ध्यानके नाम

प्रथम पंडीसीतध्यान, दूसरे रूप सत्य ध्यान, तीसरे पद सत ध्यान, चौथे रूपातीत ध्यान ॥ ४ ॥

चार पदार्थके नाम

प्रथम अर्थ, दूसरे धर्म तीसरे काम, चौथे मोक्ष ॥ ४ ॥

तीन पदके नाम

प्रथम तत्त्वपद, दूसरे तत्त्वपद, तीसरे असिपद ब्रह्म ॥ ३ ॥

तीन तापके नाम

प्रथम अध्यात्म, दूसरे अधिदेव, तीसरे अधिभूत ॥ ३ ॥

तीन जीवके नाम

प्रथम मोक्षी । दूसरे विषय, तीसरे पामर ॥

पांच खानके नाम

प्रथम मनुष्यखान । दूसरे पिण्डजखान । तीसरे अण्ड खान । चौथे उषमज खान । पांचे अस्थावर खान ॥

पांच वाणीके नाम

प्रथम सिंगिनी वाणी । दूसरे बिगिनि वाणी । तीसरे किंगिनि वाणी । चौथे इंगिनि वाणी । पांचे रिंगिनि वाणी ॥

पांच तत्त्वके नाम

प्रथम आकाश । दूसरे वायु । तीसरे तेज । चौथे जल । पांचे पृथ्वी ॥

तिनको विभाग

मानुष खानमें सिंगिनिवाणी आकाश, वायु, तेज, नीर । पृथ्वी ये चार तत्त्व पिंडज खानमें वर्तते हैं । तीसरे अण्डज खानमें किंगिनि वाणी, वायु, तेज, जल ये तीन तत्त्व अंडज खानमें