कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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कबीर चरित्रबोध
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देखा तो आनकर उसका समस्त विवरण रामानन्द स्वामीसे कहा कि, हे स्वामीजी ! मैंने लहर तालाबमें एक ऐसी ज्यो-तिका निरीक्षण किया है जिससे मुझको अत्यन्त आश्चर्य हुआ है। उस ज्योतिको आकाशसे उतरते और लहर तालाबमें ठहरते देखा जब वह प्रकाश उस तालाबमें उतरा तब तालाब ज्योतिसे प्रकाशित हो गया। यह बात सुनकर रामानन्द स्वामीने अष्टा-नन्दसे कहा कि, वह प्रकाश जो तुमने देखा था उसका कौतुक शीघ्र ही तुम्हारे देखने तथा सुननेमें आवेगा।
वह तेज बालकके आकारमें हुआ उस जलके ऊपर कम-लोंके पुष्पोंमें उतराने और बालकोंके सहश हाथ पाव फेंकने लगा वह तेज अपनी समस्त प्रभाओंको पृथक् करके मनुष्यके बच्चेके आकारमें दिखलायी दिया।
नीरूके पूर्वजन्मका वृत्तान्त
श्वपच सुदर्शनके जो माता पिता थे वे दोनों भङ्गीका शरीर छोड़कर ब्राह्मण ब्राह्मणी हुए थे, और चँदबोर नगरमें रहते थे, इनके प्रेमसे कबीर साहब इनके घर गये और उनको सुक्ति-मार्ग बतलाने लगे, परन्तु उन्होंने ध्यान नहीं दिया, तब सत्य गुरु उनके गृहसे अन्तर्धान हो गये। इसके उपरान्त वे दोनों ब्राह्मण ब्राह्मणी परलोकगामी होकर काशीमें जोलाहा जोलाही हुए और उनका नाम नीरू और नीमाह्वाद है। सुदर्शनजीके माता पिता तीसरे जन्ममें जोलाहा जोलाही हुए थे। इनको सुक्तिप्रदान करनेके निमित्त पुनः कबीर साहब उनके घर गये और काशीमें लहर तालाबमें प्रकट हुए।
कबीर साहबका नीमाको मिलना
नीरू जोलाहा काशी नगरीमें रहता था, एक दिवस वह अपनी