भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1870

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बोधसागर

स्त्री सहित चला आता था, देवात् वह लहर तालाबके सर्मी-पसे होकर निकला । उसकी स्त्री नीमा प्यासी हुई और जल पीनेके निमित्त उस तालाब पर गयी वहीँ देखा तो एक बड़ा ही सुन्दर बालक कमलोंमें पैरता फिरता है और हाथ पाँव फेंक रहा है । उस बालकको देखकर नीमा तालाबके भीतर घुसकर उस बच्चेको अपनी गोदमें उठा लिया और तालाबसे बाहर निकलकर नीरूके पास गयी ।

नीमा और नीरूकी बातचीत

तब पूछा कि, यह किसका लड़का ले आयी है ? तब नीमाने उत्तर दिया कि, मैंने तालाबमें पाया है । नीरूने कह दिया कि, यह लड़का जहाँसे तू ले आयी है वहाँ ही रख आ नहीं मालूम यह किसका लड़का है । तब उस स्त्रीने उत्तर दिया कि, ऐसा सुन्दर बालक तो मैं कदापि नहीं फेंकूँगी । तब नीरूने कहा कि, लोग मुझको हँसेंगे और ठट्टाएँ उड़ावेंगे कि सुकलावेहीमें नीरू अपनी स्त्रीके साथ एक पुत्र भी ले आया, इस कारण इस बालकको तू फेंकि आ । इस बातको जब नीमाने स्वीकार नहीं किया तब नीरू अपनी स्त्रीको मारने पीटनेपर प्रस्तुत हुआ और झिड़कियाँ देने लगा । अब वह स्त्री खड़े खड़े अपने चित्तमें चिंता करने लगी । इतनेमें वह बालक स्वयम् बोल उठा कि, ऐ नीमा मैं तेरे पूर्वजन्म प्रेमके कारण तेरे घर आया हूँ । तू मुझको मत फेंक और अपने घर ले चल यदि मेरा कहना मानोगी तो मैं तुम्हें आवागमनके फेरेसे छुड़ा दूँगा और मुक्तिप्रदान करूँगा, समस्त दुःख संताप हर कर और वह शब्द बतलाऊंगा कि, जिससे कभी कालके फंदेमें नहीं पड़ेगी ।