कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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कबीर चरित्रबोध
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जब वह बालक इस प्रकार बोला तो उसकी बात सुनकर नीमा निर्भय हो गयी, बालककी बात सुनकर नीरू भी कुछ नहीं बोला । अब वे दोनों प्रसन्नतापूर्वक उस बालकको लेकर अपने घर आये । जब काशीके लोगोंने देखा कि, नीरू तो अपनी स्त्रीके साथ एक पुत्र भी ले आया तो लोग ठट्टा और हँसी करने लगे । तब नीरूने लोगोंको समझाया कि, हमने यह बालक लहर तालाबमें पाया है, बालकका कुल विवरण कह सुनाया, फिर बुलाकर पूछने लगा कि इस बालकका क्या नाम रखना चाहिये । ब्राह्मण पत्रा लिये विचार ही रहे थे, इतनेमें वह बालक स्वयम् बोल उठा कि ऐ ब्राह्मण ! मेरा नाम कबीर है, दूसरा नाम रखनेकी चिन्ता मत करो । यह बात सुनकर सब लोग अत्यन्त चकित हुए कि यह बालक तो स्वयम् ही अपना नाम बतलाता है यह कैसा बालक है यह किसी सिद्धका अवतार है कि कोई देवता है ? काशीमें इस बातकी चर्चा घर घर होने लगी कि, नीरूके घरमें एक बच्चा आया है सो बातें करता है । फिर नीरूने काजीको बुलाया और पूछा कि, इस बालकका क्या नाम रखना चाहिये । जब काजी किताब खोलकर बालकका नाम स्थिर करने लगा तब कुरानके मध्यमें बालकके चार नाम निकले कबीर १ अकबर २ किबरा ३ किबरिया ४ ये चार नाम देखकर काजी चुप हो रहा और अपने दातोंके नीचे अँगुली दबाने लगा । फिर फिर वह कुरान खोलकर देखता तो समस्त कुरान उसको उन्हीं नामोंसे भरा दिखाई दिया । अब काजीके मनमें अत्यन्त सन्देह उत्पन्न हुआ