कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर
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ल्मानी ) कराओ । फिर एक दिन सुकरूर करके जुलाहे एकत्रित हुए और काजीको बुलाया । जब नाई उस्तारा लेकर कबीर साहबके सामने गया तब आपने पांच लिंग उसको दिखलाये और उससे कहा कि, इन पाँचोंमेंसे जिसको चाहे तू काट ले । यह अवस्था देखकर नाई तो भयभीत होकर भाग गया और आपका सुन्नत नहीं हुआ ।
एक दिन आप छोटे-छोटे बच्चोंके साथ खेल रहे थे, उस समय काजीने गोवधका प्रबंध किया और गऊके जबह करनेका समय आया तब आपने सब वृत्तांत जान लिया कि, काजी गऊके जबह करनेके विचारमें है । ऐसा जान करके बालकोंके साथका खेलना छोड़कर गऊकी ओर दौड़े । जबतक गायके समीप पहुँचे तबतक तो काजीने गऊको समाप्त कर दिया । कबीर साहब आकर उस काजीको उपदेश देने लगे जिससे लज्जित होकर काजी अपने अपराधके निमित्त क्षमाका प्रार्थी हुआ । फिर कबीर साहब उस गऊको जीवित करके और आप अंतर्धान हो गये ।
जब आप अंतर्धान हो गये तब जुलाहा जुलाही आपको दूँदने लगे । जब कई दिनों तक कबीर साहब उन्हें नहीं मिले तब उनको बड़ा दुःख हुआ और वे फूट-फूट कर रोने लगे । समस्त नगरमें दूँद डाला पर आप कहीं नहीं मिले । उसको तीन दिन भूखे प्यासे बीत गये, अन्नजल कुछ भी उसके मुँहमें नहीं गया । वे अत्यन्त निर्बल तथा अशक्त हो गये । जब आपने उन दोनोंको नितांत ही विह्वल पाया तब आप उनके सामने प्रकट हो गये । आपको देखते ही वे प्रसन्न होकर चरणोंपर गिर पड़े और कहने लगे कि, आप किधर चले गये ? हम