कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1889, कुल 2136 में से
संदर्भ में पढ़ें२७
कबीर चरित्रबोध
( १८११ )
स्तुति करने लगे । रामानन्द तो कबीर साहबकी प्रशंसा करते और कबीरसाहब अपने गुरुका गुण गाया करते थे ।
गोरखको जीतना
उस समय गोरखनाथ योगी जो बड़ा ही बलिष्ठ था और प्रायः रामानन्द स्वामीसे आकर वाद विवाद किया करता था उसका सामना कबीर साहबसे हुआ और कबीर साहबका गोरखनाथके साथ बड़ाही वाद विवाद हुआ और दोनोंही ओरसे अनेक कौतुक दिखलाई दिये जो लोगोंमें प्रसिद्ध हैं । अन्तमें गोरखनाथ परास्त हुआ और अपनी सेली और टोपी कबीर साहबके चरणोंपर चढ़ाकर तथा दंडवत् और प्रणाम करके एक ओरको चला गया ।
शाह सिकन्दरलोदीका काशीमें आना और कबीर साहबसे
मिलना तथा रामानन्द स्वामीका परलोक—गमन
सम्बत् १५४५ विक्रमीमें बहलोल लोदीका पुत्र सिकन्दर लोदी काशी नगरमें पहुँचा, बादशाहके शरीरमें कुछ दिनोंसे जलनका रोग था, रात दिन उसका शरीर जला करता था । उस रोगसे उसे तनिक भी चैन नहीं मिलता था ।
काशीमें पहुँचनेपर बादशाहने सुना कि, वहाँ रामानन्द स्वामी महासिद्ध महात्मा हैं उनके आशीर्वादसे यह रोग दूर हो जायगा । बादशाह दुःखसे कातर हो स्वामी रामानन्दजीके आश्रमको पहुँचा । स्वामीजीने अपने नियमानुसार बादशाहका मुख देखना नहीं चाहा । बादशाहने बहुत विनती की किंतु स्वामीजीने नहीं माना ।
चौपाई
आये सिकन्दर शाहसुलताना । है व्याधा बहु भेद न जाना ॥