कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर
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रामानन्दकी सुनी बड़ाई । ताते शाह आप चलि आई ॥ आये मंडप जबै सुलताना । रामानन्द तब देखि रिसाना ॥ बादशाह सम्मुख भये जबहीं । रामानन्द मुख फेरा तबहीं ॥ बार अनेक तिहिते मुख फेरा । ताकी ओर क्रोधकरि हेरा ॥
तब बादशाहने क्रोध करके तलवारसे स्वामी रामानन्दका शिर काट लिया । स्वामीका शिर काटते ही बादशाह विकल होकर वहाँही पृथ्वीपर गिर गया । लोगोंने हाथों हाथ शाहको उठाकर डेरेंपर पहुँचाया ।
रामानन्द स्वामीके कत्ल होनेका समाचार शहरमें तुरंत फैल गया । बादशाहके जुल्मको सुनकर धर्मात्मा लोग तो ईश्वरेच्छा समझकर चुप हो रहे किन्तु अधर्मी मिथ्या धर्मके पक्षपाती लोग बढ़बढ़कर बातें करने लगे । कबीर साहबसे द्वेष रखनेवाले मुल्ला काजी और झूठे पण्डितोंने अच्छा दाव विचारा वे बादशाहको क्रोधित कराकर कबीर साहबको भी कत्ल करानेकी चिंतामें लगे ।
उधर बादशाहको भी कुछ चेति हुई तब उसने लोगोंसे पूछा कि यहाँ और कोई ऐसा नहीं है जिसकी कृपासे मेरे शरीरकी जलन दूर हो जावे । कबीर साहबके विदेशी प्रथमसेही घातमें लगे हुए थे । बादशाहके पूछते ही चट उन्होंने उत्तर दिया कि, कबीर नामक रामानन्दका एक शिष्य इस शहरमें बड़ा सिद्ध माना जाता है अगर वह आवे तो शाहकी बीमारी तत्काल अच्छी हो जावे । उन लोगोंकी बात सुनकर बादशाहने आज्ञा दी कि, पता लगावो कबीर साहब इस समय कहाँ विराजमान हैं, मैं इसी समय वहीं जाकर उनका दर्शन करूँगा । शाही नौकरोने