कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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कबीर चरित्रबोध
( १८१३ )
शहरमें फिरकर उसी समय पता लगाया कि, कबीर साहब रामानंद स्वामीकी मृत्युका समाचार सुनकर स्वामीजीके आश्रमपर विराजमान हैं। बादशाह तुरत फिर उसी स्थानपर पहुँचा। अब कबीर साहबके विद्वेषियोंको निश्चय हो गया कि, आज कबीर साहब अवश्य कत्ल किये जायेंगे, क्योंकि बादशाहने गुरु रामानन्दजीको कत्ल किया है इससे कबीर साहब क्रोधमें होंगे। जब गुरुघाती बादशाहको अपने सम्मुख खड़ा देखेंगे तब कबीरसाहब क्रोध किये बिना रह नहीं सकेंगे और जैसे ही कबीर साहब बादशाह पर क्रोध करेंगे वैसे ही स्वामी रामानन्दके समान बादशाह उनको कत्ल करेगा। अज्ञानी लोग ऐसे ही शोचते हुए बादशाहके पीछे पीछे रवाना हुए। मार्गमें न जाने वे क्या क्या मनोराज्य करते जाते थे।
बादशाह जैसे ही कबीर साहबके सम्मुख पहुँचा, दर्शन पाते ही उसके शरीरकी सब जलन शान्त हो गयी। केवल जलन ही नहीं जलनके साथ साथ मिथ्या धर्मद्वेष भी जो धर्मके नामसे अज्ञानियोंने उसके हृदयमें ठसा रखा था एकदम जाता रहा। कबीर साहबके दर्शनने उसका अंतःकरण ऐसा शुद्ध कर दिया कि, उसके समान कट्टर मुसलमान बादशाह मिथ्या धर्माभिमान छोड़कर एकदम दौड़कर कबीर साहबके चरणोंपर गिर पड़ा और स्वामी रामानन्दजीके कत्ल करनेके अपराध पर पश्चाताप करके क्षमाका प्रार्थी हुआ। बादशाहके पश्चाताप और आधीनताको देखकर कबीर साहबने उसके अपराधको क्षमा करके धैर्य दिलाया।
अपने विचारके विरुद्ध बादशाहको कबीर साहबके आधीन होते देखकर विद्वेषियोंके मनमें बड़ी ग्लानि आयी। उन्होंने