कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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कबीर चरित्रबोध
( १८२१ )
बुजुर्ग सब नेकी फरमावे । जोर जुल्म कुछ ताहि न भावे ॥ कहा हमारा कीजिये, छोड़ दीजिये शर । सुलह कुल्ह दे बैठिये, अच्छा ओर निहार ॥
शेखतकी वचन
कहे तकी सुलतान सुन, तुझे नहीं कछु दोष । जो मैं कहूं सो मानिये, कर मेरो सन्तोष ॥
सिकन्दर वचन
कहे सिकन्दर पीर सुन, मेरो शिर बरु लेहु । फकड़ कबीर न मारिये, यह माँगे मोहि देहु ॥ सुन्ते ही तकी कोथ प्रचारा । शिरसे ताज जमीपर मारा ॥ निपट विकल देखा तेहि भाई । तब हम शाहसे कहा बुझाई ॥
कबीर वचन
कहे कबीर सुनो सुलताना । करो पीरको वचन प्रमाना ॥ पीर कहै सो करो तुम, हमै नहीं कछु त्रास । हमहूं कहैं सत नाम बल, कहैं कबीर सुदास ॥
सिकन्दर वचन
कहै सिकन्दर सुनो जी पीग । मन मानै सो करो कबीरा ॥ डारो मार कबीरको, हम नहिं मानैं ऊन । ताका कबहुँ न भला हो, जो करे फक्कड़ खून ॥
शेखतकी वचन
शेखतकी तब कहे रिसाई । है कोई बाँध कबीरा भाई ॥ गंगामें डुबाया जाना
शेखतकी आपै उठै, काजी पण्डित झार । बाँध बाँध सब कोइ कहे, कोई न करे गोहार ॥ बाँह बाँध पग बाँधके, बोर गंगजल नीर ।