भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1938

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बोधसागर

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कबीर साहबने कहा है कि, ब्रह्मा विष्णु तथा शिव ये जो तीन देवता हैं वे सहज द्रौपपर्यत पहुँच सकते हैं इसके आगे किसी-को तनिक भी सुध नहीं है। तीन देवता सहज द्रौप पर्यतकी सुध रखते हैं परंतु मनुष्योंसे वे नहीं बतलाते, अपना भेद अपने मनमें रखते हैं और भलाई बुराईके समस्त कार्योंका रचयिता निरञ्जन हैं, भलाई करो तो स्वर्ग और वैकुण्ठमें जाय, यदि बुराई करे तो नरकमें प्रवेशित हो, चाहे मृत्युलोकमें जन्म लेता रहे। जैसे आकाशके सुखका विवरण है वैसे ही नरकयंत्रणा अत्यन्त भयानक है। सुतरां मुसलमानी पुस्तकोंमें मैंने पढ़ा था कि जिस समय हजरत दाऊद नरकयंत्रणाका विवरण किया करते थे उस समय सुननेवाले बेतरह रोते तथा तड़पते और कितने भयके मारे मर जाते थे।

और लिखा है कि एक बेर नरकयंत्रणाको सुनकर सत्तर मनुष्य मारे भयके मर गये। और स्वयम् दाऊद ऐसा रोता था और तड़पता था कि, अचेत हो जाता था। और ऐसा हाथ पाँव और शिर पीटता था कि, उसकी लौडियाँ और लोग लासको पकड़ लेते और वह अत्यन्त विह्वल तथा बेशुध हो जाता था और दाऊद यद्यपि बादशाह था तथापि समस्त निशा वह ऐसा रुदन किया करता था कि उसका बिछौना भीग जाता था और जब वह परमेश्वरके प्रेममें गाता और नाचता तब स्थावर तथा जंगम हिल जाते थे।

और कबीर साहबकी आज्ञा है कि, जिसमें परमेश्वरका भय नहीं है और हार्दिक प्रेम नहीं है वे कदापि मुक्ति नहीं पा सकेंगे सो समस्त पीर पैगम्बरों और सिद्ध साधुओंका सच्चा