कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1944, कुल 2136 में से
संदर्भ में पढ़ें( १८६६ )
बोधसागर
८२
कमलनाम साहब कहुँ पाँचवाँ । जगतके गुरु पीर सो बेगमाँ ॥ हैं छठएँ खुदावन्दनामेअमोल । किजिसखौफसेभागजायमकेगोल॥ जो सूरत सनेही साहब सातवाँ । कि जंगी मेहर देखिये आतमाँ ॥ जो पैदा हुए आठवें नामइक । मलिकमौतका होगया सीनःशक ॥ नवैपाकसाहब हुए नामपाक । सरमभूतको सो मिलाया है खाक॥ प्रकट नामसाहब प्रकट हैं दहम । किसामानमुक्ती किया सोबहम॥ धीरजनामसाहबइग्यारहवें जो आये । किधीरजनिगहजीवधीरज हुए॥ उगरनाम साहब हुए बारहवें । परमपंथ परचार इस अहदमें ॥ तेरहवीं उदय पहने आदमकबा । तोजमशेर गुराँभगाहुम दबा ॥ हुई तेरहवीं कुरसी आली दिमाग । कि दरजा हरेहोगयेखुशकबाग॥ हुवा जोर वो शोरसंतनामको । सला है करमखास ओ आमको॥ मिलीं बारहों पथ इस अहदमें । सतायश करें गुरुकी यकमहदमें ॥ कुरु नामसाहब कहे चौदहवाँ । कि जिनकी बुजुर्गी बदरहो जहाँ॥ जो परकाश परकाश हो रही । सना इन्द्रअस्त नाम दरजा कहीं॥ उदितसोलहवीं साथ जोशन हुए । तो जम जङ्गमें नाम रोशनहुए॥ किजब सत्रहवींहोवें साहबसुकुन्द।हुएकालके दाँत इसवक्त कुन्द॥ अरधनाम अट्टारवी दर्दमंद । कि आवागमनकी किया राह बंद॥ जो उन्नीसवीं नाम ज्ञानी गुरु । करै जीवको पुर्षके हबरू ॥ कहो बीसवीं साहब हंस मन । न जिनसे लगे कालका कोई फन ॥ सुकृतिनामसाहबहुएबीसएक । तो सुरकीरतकी जगमें रहैखुब ठीक॥ अरजनाम बाईस जाहिर हुए । तो इनसां परमपदके माहिर हुए ॥ हैरसनाम साहब जरसबीस तीन । सुन आवाजताबेहुई सबजमीन॥ हों चौबीसवीं गंग मुनिसाहब गुनहसे हों सब आदमी तायब ॥ पुरुषनामसाहबदरसबीसपाँच । नजिउकोलगेसंगेसोजाकी प्राँच ॥ छबीसवीं जाग्रतनाम साहब जगे । नइनसाँकोरहजनवठगतबठगे ॥