भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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कबीर चरित्रबोध

( १८६७ )

हुए भृगुमुनि साहब सातबीस । रहेरास्त दुश्मनदियाजिसनेदींस ॥ अस्त नामसाहबकहेबीसआठ । कियमदूतकोजोदियामारकाट ॥ हैं उन्तीसवीं साहबकंठ मुन । कियाकालको मारकरसो दफन ॥ हैं सन्तोष मुनिसाहब तीसवें । पयान पुरुष आवें इस अहदमें ॥ यह खुशवक्त दैरांदिखाया हमें । परमपुरुष पैगामा आया हमें ॥ जमीं सारीसतनामकी हाँकहै । तोदरकौमको सुत्तिकी झाँक है ॥ हुई सारे आलममेंयहधूमधाम।तअस्सुबत जो और भजोसत्यनाम॥ जमी सारी पर हुक्मरानी हुई । बाहर कौमपर मेहरबानी हुई ॥ यहूदी तिसार मुसलमां हिन्दू । पढ़े कमलये सत्यनामसे हुरूदा ॥ चातर्कनामसाहबकाएकतीसदौर । जमींपरनबाकीरहेयमकाजोर ॥ बत्तीसवेंबरामदहुएआदिनाम । हुएसारेनफसानीहरकतगुलाम ॥ हैं तेतीसवें वेद नामें बुजुर्ग । कि जिस सामने हो न शैता सतर्ग ॥ साहब आदिनाम हुए तीस चार । कि उसमेहसेजीवहों कामगार ॥ महानाम साहब हैं पैँतीसवाँ । जमीपरहुवा है अमन ओ अमाँ ॥ छ्तीसवें हैं निजनामसाहबखदीन । नबाकीरहेरेवकुछनफसदेन ॥ साहबदाससाहबकासैतीसअक्ष । दियबारशइनसानकेजिसने वक्ष ॥ उदयदाससाहबहों अडतीस पुश्त । इलमतिलमसबमें न कोईदुरस्त ॥ कुरदनामसाहबकानौतीसवक्त । बहरहोजहाँजिनकोहैताजोतरक्त ॥ चेहले हग मुनीसाहबनामले । तोसत्यलोककोआदमीसबचले ॥ महामुनि साहबनामचालीसएक । बदी बेखकुन आदमीसारेनेक ॥ बयालीस मुक्तामनी साहब है । आखिर जमां सत्पुरुष नायब है ॥ यह जबतक बयालीस पीढ़ी रहे । परमधामकी जगमें सीढ़ी रहे ॥ बयालीसका जबतलक नाम है । नकब्बीरका जगतमें काम है ॥ यह सद्गुरुकेसबहंस हैं जानशीं । परमपुरुषके सारशब्द अभी ॥ बयालीस जबतक रहेंगे वजीर । जहाँमें न जाहिरफिरेंफिर कबीर ॥