भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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कबीर चरित्रबोध

( १८७१ )

इन पंथोंके अतिरिक्त हिन्दू और मुसलमानोंमें कबीर साहबके कितने ही पंथ हैं जिनकी यथार्थता अभीलों भली भाँति ज्ञात नहीं हुई है इस कारणसे मैं कुछ लिख नहीं सकता हूँ। और कितने पंथके लोग ऐसे हैं कि, जिनके पंथके मनुष्य अब कबीर साहबको नहीं मानते सुतरां नानकशाह और दाउद राम और शिवनारायणदास इत्यादि।

जो लोग कबीर साहबको नहीं मानते उनका नाम शिष्योंमें लिखना किसी प्रकार युक्तिसंगत नहीं है। तो भी यह नहीं कहा जा सकता है कि, जो कबीर साहबको नहीं मानते हैं उसमें उनके गुरुओंका दोष है। अथवा उनके पंथदर्शकोंका जिसको दोष होगा वही दोषी माना जावेगा।

महाप्रलयका वृत्तांत

महाप्रलयके विवरणका निचोड़ यह है कि, प्रलयके अनेक भयानक चिह्न परिलक्षित होंगे और पृथ्वीपर पाप विशेष होंगे। महाप्रलयके सवासौ वर्ष पूर्वपर्यन्त बराबर ग्रहण लगाता जावेगा, एकसौ वर्ष पर्यन्त बगबर चन्द्रग्रहण होगा और इसके उपरान्त सूर्यग्रहण होगा जब सूर्य और चन्द्रग्रहण समाप्त हो चुकेगा तब महाप्रलय आवेगी। इतनी पानीकी विशेषता होगी कि, पृथ्वीसे ऊपर इतना ऊँचा चढ़ेगा कि, जलकी लहर व झाग दश सहस्र योजन ऊँची उठेगी और समस्त जीव मर जावेंगे और समस्त शून्य हो जावेगा। पृथ्वी तथा आकाशमें कहीं कुछ दिखलाई नहीं देगा। और समस्त संसारकी रचनाको कालपुरुष समेट लेगा। और पांच तत्त्व तीन गुण कालपुरुषमें समाजावेंगे और आद्याको कालपुरुष निगल जावेगा। और निरंजनके मस्तकमें एक अर्ध गोलाकार