कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर
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चौपाई
सत्य सुकृति सुमिरो मन माही । दूटत बन्न राखलेउ ताही ।
साखी-सत्य सुकृतिकी बालक है, जो चितवै कर डीठ ।
ताजन तोरौ चौहटे, गुनहगारकी पीठ ॥
जदि्या कहूँ तो जगतरै, परकट कहो न जाय ।
गुस परवाना देत हौं, राखो शिरे चढ़ाय ॥
जिन डरपो तुम कालका, कर मेरी परतीत ।
समद्रीप नौ खण्डमें, चलिहौ भवजल जीत ॥
यहाँलौं तो चार गुरु और बयालीस वंशका लेखा लग चुका है इनके अतिरिक्त कबीर साहबके बारह पंथ और भी कबीर-पन्थी ही कहलाते हैं ।
कबीर साहबके पंथोंका वृत्तान्त
१-नारायणदासजीका पंथ । २-यागौदासजीकापंथ । ३-सूरत गोपाल पंथ । ४-मूलनिरञ्जनका पंथ । ५-टकसारी पंथ । ६-भगवान्दासजी का पंथ । ७-सत्यनामी पंथ । ८-कमालीपंथ । ९-राम कबीर पंथ । १०-प्रेमधामकी वाणी । ११-जीवा पंथ । १२-गरीबदास पंथ ।
यह तो कबीर साहबके बारह पंथ हैं । इनमें कोई २ अच्छे हैं । और कोई निबेल विश्वासके हैं । और रामकबीरके लोग ठाकुरपूजा करते हैं । और सत्यनामियोंके ध्यान भी विचलित प्रायः हैं । इन बारह पंथोंका यही विवरण है और इन बारह पंथोंके अतिरिक्त कबीर साहबके और पंथ भी हैं ।
कबीर साहबके भिन्न २ पंथोंका वृत्तान्त
नानकपंथ-दादू पंथ-यानिप पंथ-मूलकदास पंथ-गणेश पंथ इत्यादि ।