कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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कबीर चरित्रबोध
( १८७३ )
के निमित्त पृथ्वीपर आया करते और मनुष्योंको मुक्ति प्रदान किया करते हैं ।
यह तो ब्रह्माण्डके महाप्रलयका विवरण हुआ और इसी प्रकार पिंडकी प्रलय भी होती है । कारण यह कि, जो कुछ पिंडमें है सोई ब्रह्माण्डमें है तनिक भी न्यूनता नहीं है । परन्तु सबसे बड़ा महाप्रलय भी एक दिवस होगा । जब केवल एक सत्यपुरुष और सत्य लोकही रह जावेगा और कहीं कुछ न रहेगा । अर्थात् दयाद्वीप नासुतसे लेकर सहज द्वीप अर्थात् आहूत स्थान पर्यंत सब विलोपित हो जावेंगे । केवल सत्य-लोकमें ही शान्ति रहेगी । और सत्य लोकके हंस सब सुरक्षित और सत्यपुरुषकी रक्षामें सदैव समान रहेंगे ।
कबीर साहबके अन्तर्धान होनेका वृत्तान्त
जब काशीके मनुष्योंने कबीरसाहबकी अनेक लीलाएँ देखली और जान लिया कि, यह तो स्वयम् परमेश्वर हैं और न किसीके मारनेसे मरते हैं न काटनेसे कटते हैं और न डुबानेसे डूबते हैं और न जलानेसे जलते हैं और न कोई हथियार आपके ऊपर फलित होता है और न मनुष्य तथा पशु और देवता आदि आप पर किसी प्रकारकी क्षति पहुँचा सकता है । तब उन लोगोंने आपसे पूछा कि, आपकी मृत्यु क्यों कर होगी ? उस समय आपने कहा था कि मैं मग्नह देशमें जाकर छिप जाऊंगा । अपने कथनानुसार जब कबीर साहब एकसौ बीस वर्ष पर्यंत काशीजीमें रह चुके । दो दिवस आपके जानेमें शेष रह गए तब आपने लोगोंसे कहा कि, अब मैं यहाँसे कूच करूँगा और मग्नह देशको जाऊंगा-वहाँ छिप रहूँगा । यह बात सुनकर