कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर
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काशीके लोगोंको अत्यन्त दुःख हुआ और दुखका बादल काशीजीपर छा गया और लोग अत्यन्त दुखित हुए और कहने लगे कि, आज काशी शून्य तथा उजाड़ जान पड़ती है। आज काशीका सूर्य छिप चला और नेत्रोंके सामने अन्धकार होने लगा, सब लोग कहने लगे कि हाय ! हम बड़े ही अभागे हैं हमने ऐसे सत्यवादी महात्माकी आज्ञाको अंगीकार नहीं किया। समस्त नगरमें इस बातकी धूम मच गई कि, अब कबीर साहब काशीजीसे चले जावेंगे। समस्त नगर दुःख तथा कष्टसे भर गया। काशीके लोग हाहाकार करते और कहते थे कि अब हम क्या करेंगे ? हाय ! हमने ऐसे महात्माका कहना नहीं माना। पीछेसे खरा खोटा जान पड़ता है। अबलों हम लोगोंको दिखलाई नहीं दिया। राय वीरसिंह बघेल राजा बनारसने जब सुना कि, सत्यगुरु मग्नह देशको जावेंगे वहां जाकर अन्तर्धान हो जावेंगे। अब जानेके केवल दो दिवस शेष बचे हैं तब उक्त राजा अपने दलबल सहित पहलेहीसे वहां जा पहुँचा और वहांपर सत्यगुरुकी प्रतीक्षा कर रहा था। काशीवासी कबीर साहबको घेर रहे थे और उस समय आपके समीप दश सहस्र सेवक शिष्य उपस्थित थे, उनमें कुदराम पड़ रहा था और सब बिलाप कर रहे थे और मग्नह देशका अधिपति नन्बाब बिजलीखां पठान था। वह पठान कबीर साहबका शिष्य था। जब उसने सुना कि, कबीर साहब अपना अन्तिम दिवस यहाँ करेंगे तब बड़ा प्रसन्न हुआ कि, भली बात हुई कि, सत्यगुरु अपना अन्तिम दिवस यहाँ करेंगे मैं अंतिम किया तथा कफन दफन सब कुछ अपने मत्यनुसार करूँगा। वह आपकी प्रतीक्षा