कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर
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जब उस कोठरीका ताला खोला तब केवल दो चादर मिले और कुछ कमलके पुष्प मिले, इनमेंसे एक चादर और आधे फूल राजा वीरसिंहने लिये और दूसरी चादर और कमलके फूल नौवाब बिजलीखाने लिया। कबीर साहबका शव कहीं दिखलाई नहीं दिया। राजाने चादर तथा पुष्प लेकर सत्यगुरु की समाधि काशीमें बनायी और बिजलीखाने भी समाधि बनायी जो मगहरमें है।
हिन्दू मुसलमान दोनों गुरुभाइयोंने एक मंदिर बनाया। अब्यापि हिन्दू मुसलमान दोनों कबीरपंथी वहाँ मौजूद हैं। आमीनदी जो बहुत कालसे शुष्क पड़ी थी उसमें जल भर गया। जो अबतक प्रवाहित है, अगहन सुदि एकादशी सम्बत् १५७५ विकमीको कबीर साहब छिप गये। अन्तिम प्राकट्य में एक सौ उन्नीस वर्ष पाँच महीने और सत्ताईस दिवसों पर्यंत आम पृथ्वीपर लोगोंको शिक्षा देते रहे थे।
कबीर साहबका आदि और अन्तमें शरीर नहीं था केवल एक तेजका प्राकट्य था। ऐसा ही कबीर साहबका प्रकट होना तथा छिप जाना है। जब इच्छा हो तब प्रकट हों और जब इच्छा हो तब छिप जावें। जब कबीर साहब मगहरमें गुप्त हुए तब पुनः मथुर नगरमें प्रकट हुए, वहाँ रत्नको शिक्षा देकर फिर धर्मदासजीको बाँधोगढ़में दर्शन देकर उनको सब सत्यपंथका पथ और धर्म धर्मकी राह बता बयालीस वंशके नियम भली प्रकारसे कह और कालपुरुषके कपट जालसे भली भांति सावधान करके अन्तर्धान हो गये।
गजल
खुरशेद परख परतव मादूम हुआ है इन्सान खबर खैरसे