कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1973, कुल 2136 में से
संदर्भ में पढ़ेंसत्यसुकृत, आदि अदली, अजर, अचिन्त, पुरुष, मुनीन्द्र, करुणामय, कबीर, सुरति योग संतान, धनी धर्मदास, चुरामणिनाम, सुदर्शन नाम, कुलपति नाम, प्रबोध गुरुबालापीर, केवल नाम, अमोल नाम, सुरतिसनेही नाम, हक्क नाम. पाकनाम, प्रकट नाम, धीरज नाम, उग्र नाम, दया नामकी दया, वंश- व्यालीसकी दया
अथ श्रीबोधसागरे
अष्टविंशतित्तरंगः
अथ गुरुमाहात्म्य-प्रारम्भः
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धर्मदास वचन
धर्मदास कर जोरे ठाढ़े । एकटक सुरति प्रेमचित बाढ़े ॥ करहु दया तुम निर्गुण स्वामी । वचन सुनावहु अन्तर्यामी ॥ किमि गुरु ध्यान बन्दना कीजे । होहि सुदृष्टि मोहि कहि दीजे ॥ जा पद जीव तरे भवसागर । शोक हिये हंसनपति आगर ॥ तेहि मगाशिष गुरुपद लागू । नहि धन धाम होय अनुरागू ॥