भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बोधसागर

(७३)

सतगुरु वचन

सतगुरु कहे सुनो हो राई । भक्ति प्रेम बस कतहुँ न जाई॥ तत्क्षण राजा चलिभे जबहीं । सात खण्डपर पहुँचे तबहीं ॥ सुस्वरकला रानि तहाँ रहेऊ । तासों राय वचन एक कहेऊ ॥ सुनो रानी एक वचन हमारा । अपने जीवका करौ उवारा ॥ साखी-राजा रानीसों कहै, मानो वचन हमार ॥ साहेब आये लोकसे, चरन सोगहो सम्हार ॥

रानी वचन-चौपाई

रानी कहै सुनो हो राजा । विलख वदन आये केहि काजा ॥ केहि कारन आये तुम खरारी । हमसे वचन कहो निरुवारी ॥

राजा वचन

रानी तुमसों कहूँ हवाला । जो सतगुरुने दीनो प्याला ॥ एक दिना लीला अस कियेऊ । महलनमें उजियारा भयेऊ ॥ तब हम तत्क्षण धाये जबहीं । महलन बीच पहुँचे तबहीं ॥ दरशन पाये भयउ अनन्दा । बारहिँ बार चरण गहि वंदा ॥ पलक ओट प्रभु गये विलायी । चार दिवस परे धरनि सुरझाई ॥ प्रोहित विप्र सब आये जबहीं । कहे समुझाइ हमकूँ तबहीं ॥ बनिया मोदी सगरे धाये । छीया सेठ चौधरी आये ॥ भाई भतीजे परजा धाई । काहे राय मरत हो भाई ॥ सबे मिलि आनिउठाये जबहीं । ले झारी भर दीना तबहीं ॥ ले झारी मुख धोवंत भयऊ । साहेब दरश बेगि तब दयऊ ॥ दरश पाय मैं भयउ सनाथा । रानी सत्य कहत हौं बाता ॥

रानी वचन

राजा बात कहत हौं तोही । सत्य कहूँ जो मानो मोही ॥ अब तुम बात कहत हो नीका । तेहि पाछे पुनिलागे नहि फीका ॥