कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर द्वितीय भागकी अनुक्रमणिका
इसमें चौथे तरंगसे लेकर आठवें तरंगतक है, जिसमें- चौथे तरंगमें भोपालबोध है जो पृष्ठ १ से आरंभ होकर पृष्ठ १६ पर समाप्त हुआ है ।
पाँचवाँ तरंग जगजीवन बोध है जो पृष्ठ १७ से आरम्भ होकर ६० पर समाप्त हुआ है ।
छठा तरंग गढ़बोध है जो पृष्ठ ६१ से आरंभ होकर पृष्ठ १०८ पर समाप्त हुआ है ।
सातवाँ तरंग हनुमानबोध है जो पृष्ठ १०९ से आरम्भ होकर पृष्ठ १३६ पर समाप्त हुआ है ।
आठवाँ तरंग लक्ष्मण बोध है जो पृष्ठ १३७ से आरंभ होकर पृष्ठ १६० पर समाप्त हुआ है ।
उपरोक्त तरङ्गोंकी अलग अलग अनुक्रमणिका इस प्रकार है-
अथ भोपालबोधकी अनुक्रमणिका
| विषय. | पृष्ठांक. | विषय. | पृष्ठांक. |
|---|---|---|---|
| धर्मदास साहबका सद्गुरुसे कालके जीवोंके मारनेके विषयमें प्रश्न करना और कबीर साहबका उत्तर | ५ | राजाका आरती चौका करके नामका उपदेश लेना | ११ |
| धर्मरायका मृत्युको मनुष्योंके मारनेकी आज्ञा देना | राजाको लेकर कबीर साहबका सत्यलोक को जाना | १२ | |
| सत्यगुरुका कबीर साहबको जीवों की रक्षा के लिये पृथ्वीपर आनेकी आज्ञा देना | ॥ | मंत्रि आदिका राजाको महल में न देखकर परजात्ताप और शोक करके भयसे नगर छोड़कर भाग जाना | १५ |
| कबीर साहबका जालंदर देशमें राय भोपाल के घर जाना | ६ | इति | |
| राय भोपालका कबीर साहबको क्लेश करने की सलाह करना | ७ | अथ जगजीवनबोधकी अनु-क्रमणिका | |
| राजाके अधीन होकर सद्गुरुका हास्य प्रकृता | ८ | धर्मदास साहबका गर्भवियय प्रश्न और सद्गुरुका उत्तर | २१ |
| रानीका सद्गुरुके अधीन होना | ९ | गर्भोत्पत्ति वर्णन | २२ |
| कबीर साहबका राजारानीको ज्ञान समझाना | ॥ | जगजीवनका गर्भके कष्ट से व्याकुल होकर साहबकी स्तुति और कीस करना | २३ |