भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बोधसागर द्वितीयभागको अनुक्रमणिका

विषय.पृष्ठांक.विषय.पृष्ठांक
साहबका दया करके जगजीवनसे कौल लेकरसदगुरुका राजाको अपना प्रतिनिधि बना
गर्भसे मुक्त करना२५कर गमन करना४९
पिशुन कर्म वर्णन२६राजाका सत्यलोक गमनकी तय्यारी करना
पिशुनके फेरमें पड़कर जगजीवनका गर्भ-और अधिकारी हूँताँका साथ जाना५०
का कौल भूल जाना और संसारी बँधबन्धमेंसत्य लोकके मार्गमें धर्मरायसे हूँताँ का
मगन होना२९वातालाप५१
सदगुरुका पाटनमें पहुँचना और एक सूखेकामिनीसे बातचीत५२
बागमें ठहरना, उसका हरा होजानाहंस गुज्रन जनसे बातचीत५३
और राजाका खबर पाकर बाग देखनेसब हूँताँको लेकर ज्ञानीजीका सत्य पुरुषके
आना फिर कबीर साहबसे मिलना३२सन्मुख जाना और सत्य पुरुषको प्रसन्नता५४
सदगुरुका राजा हो गर्भका कौल यादग्रन्थसार५६
दिलाना३४इति
राजाका सदगुरुसे उद्धारकी बिल्ली करना३५अथगुरुबोधकी अनुक्रमणिका
सदगुरुका राजाको आरती करनेका उप-सत्यपुरुषका ज्ञानीजीको संसारमें जाकर
देश देना३०जीवोंको चितानेको आज्ञा देना६५
राजाका पहलेके हूँताँका हाल पूछना औरज्ञानीजीका संसारमें आना और गुरुसे
सदगुरुका उत्तर देना३७भेट होना६६
राजा रानी इत्यादि सब परिवारका सद-गुरुका श्रीकृष्णके पास जाकर ज्ञान करना६७
गुरुकी शरणमें आना और राजकुंवरकागुरुका ज्ञानीजीके आधीन होना६८
हट करना पीछे शरणमें आना३९श्रीकृष्णका गुरुको कबीर साहबको गुरु
कुफर्मा जीवके उद्धारका उपाय४०बनानेको आज्ञा देना७०
सत्यलोकके आनेका मार्ग"गुरुका आरतीका साज एकट्ठा करना७१
आरती कराकर राजा तथा अन्य जीवों-गुरुका सब देवोंको आरतीमें बुलानेके
का पान लेना४३लिये नेवता देनेको ब्रह्मसभामें जाना"
तन छूटने पर हंसका स्थान कर्मानुसार भिन्नमहादेवका बोध करना और गुरुका उन्हें
२ लोककी प्राप्ति४४समझाना७२
राजाका सदगुरुसे लोक लेजानेको बिल्लीगुरुकी आरतीमें सब देवोंका आना और
करना४५गुरुका परवाना लेना७३
सदगुरुका प्रसाद पाना४६गुरुका त्रिवेवसे जर्बा करने जाना७४
पान माहात्म्य४७गुरु और ब्रह्मासे जर्बा"
काल ज्ञान"ब्रह्माका विमान भंजकर विष्णु और महादेव
सदगुरुका पाटनसे चलनेका बिचार प्रगटको बुलाना७७
करना और बहूँके हूँताँकी बिल्ली४८
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