भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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श्रीजगद्गुरवे नमः

अथ श्रीबोधसागरे

नवमस्तरंगः

मुहम्मदबोध

धर्मदास--वचन

साखी-धर्मदास विनती करे, कृपा करहुं गुरुदेव ॥

नबी महम्मद जस भये, सो सब कहिये भेव

सत्यकबीर वचन-चौपाई

धर्मदास पूछ्यो भल बानी । सो सब कथा कहँ सहिदानी ॥

जेहि औसुर मुहम्मद औतारा । धरम आपनो जगत पसारा ॥

मारि काटि निज धर्म चलायो । जाते जीव बहुत दुख पायो ॥

परम पुरुष दिल दायो आयी । मुक्ता मणि कहँ कह्यो बुझायी ॥

मुक्तामणि संसार सिधाओ । काल कष्टते जीव बचाओ ॥

विगसी कमल उठी असबानी । मुक्तामनि सुनियो तुम ज्ञानी ॥

भवमें जाओ जीवके काजा । जीवन कष्ट देत यमराजा ॥

मुक्तामणि चले शीस नवायी । तेही क्षण भव प्रकटे आयी ॥

साखी-दोसौ युग कलि युग गयो, तब आयो संसार ॥

बहुतक जीव चितायऊ, कोइ कोइ हंस हमार ॥

चौपाई

ऐसे बहुत दिन गयो सिरायी । सिंचल द्रीपमें पहुंच्यो जायी ॥

तब वह मिले मुहम्मद पीरा । जिन सब हुकुम कीन तागीरा ॥