भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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( ६ )

मुहम्मदबोध

तहाँ जाय हम कीन सलामा । मात रहे अलमस्त इलामा ॥ नजर दिदार जो कीन हमारी । मत्त गयन्द करे असवारी ॥ कहु भाई तुम कहैं भरमाये । कहाँ ते आये कहाँ को जाये ॥ नाहक को नहिं साहब राजी । पढ़ि कुरान पूछो तुम काजी ॥ हुए हैरान नजर नहिं आये । किया नसीहत अल्ला फरमाये ॥

मुहम्मद वचन

साखी—कहाँ ते आये पीर तुम, क्यों कर किया पयान ॥ कौन शक्सका हुक्म है, किसका है फरमान ॥

रमैनी

पीर मुहम्मद सखुन जो खोला । अल्ला हमसे परदै बोला ॥ हम अहदी अल्ला फरमाना । वतन लाहूत मोर अस्थाना ॥ उन भेजे रूह बारह हजार । उम्मतके हम हैं सरदारा ॥ तिस कारण जो हम चलि आये । सोवत थे सब जीव जगाये ॥ जीव खाबमें परो भुलाये । तिस कारन फरमान ले आये ॥ तुम बूझो सो कौन हो भाई । अपनो ईस्म कहो सखुझाई ॥ साखी—दूरकी बाते जो करौ, करते रोजा नमाज ॥ सो पहुँचे लाहूतको, खोवे कुलकी लाज ॥

कबीर वचन

कहैं कबीर सुनो हो पीरा । तुम लाहूत करो तागीरा ॥ तुम भूले सो मरम न पाया । दे फरमान तुम्हें भरमाया ॥ फिर फिर आव फिर फिर जाई । बद अमली किसने फरमाई ॥ लाहूत मुकाम बीचको भाई । बिन तहकीक असल ठहराई ॥ तुम ऐसे उनके बहुतेरे । ले फरमान जाव तुम डेरे ॥

१ नाम । २ इसका वर्णन ग्रन्थ सारमें देखो । ३ स्थान ४ जाँच ।