भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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(२८)

काफिरबोध

ताका साहेब मक्का वस्त । मकवन्तका साहेब अकिल मन्द ॥ अकिलमन्द अकिल सोजाना । मन सुरीद दोस्ती दाना ॥ सहर गदाई कौन यार । सिर खुरदनी कौन यार ॥ बन्दी खाने कौन यार । तख्त बादशाही कौन यार ॥ काया यार सिर खुदनी । दिल यार मार मांहीं ॥ जीव यार बन्दी खाने । मन यार तख्त बादशाही ॥ मनलाल दिललाललालपोतदा । रहमसा ही हमसाहपोतदार ॥

इति कबीर साहब का वचन उचार विचार

अथ खान मुहम्मद अली पादशाहका प्रबोध ।

कलिक कीमोक लिस रसमें की चसमें । खदयर संयम करदम । ओजूद राह चकित करदम ।

औवल-अक्के पीर है । मन सुरीद है । तन शहीद है असल गदाई है । तकबुर दुशमन है गुस्सा हराम है । नफस शैतान है । चोरी लानती है । जुवारी पलीदी है । अदब आदि है । आदब कम असल है । राह पीर है । बैराह बेपीर है । सांह- विहिश्त है झूठ दोजख है । मोमदिल पाक है । संगदि नापाक है । हिर्स हैवान है बेहिर्स बली है ॥

लाह लुई दरकत है । अचेत गुलाम है । असलजादेको सलाम है । कृतहीन जर्दरू है । दाना जोहरी है । असलकी दोस्ती है । दाना शायर है । बूझ महबूब है । बन्दगी कबूल है । अल्लाह नूर है । आलम हद है । साहिब बेहद है । यकीन मुसलमान है । शील रोजा है । शर्म सुन्नत है । ईमान मुसलमान है । बेईमान बेदीन है । दिल दलील है बाँग बलेल है । फकीरी सबूरी है नासबूरी मकारी है । दरोग दन्द है ।

इति समझौता