कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 770, कुल 2136 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३० )
काफिरबोध
३ तीसरा फिरिश्ता शामा ( श्राणेन्द्रिय ) है । यह फिरिश्ता सुगन्धि दुर्गन्धि को बतलाता है ।
४ चौथा फिरिश्ता लमस ( स्पशेंन्द्रिय ) है जो बतलाता है कठिन और कोमल को ।
५ पाँचवा फिरिश्ता जायका ( रसेन्द्री ) है जो छः प्रकार के रसोंका ज्ञान बतलाता है ।
६ छठा फिरिश्ता हाथ है जो हाथ से करने योग्य कामों को सिखाता है ।
७ सातवाँ फिरिश्ता पाँव है जो चलने फिरने को बतलाता है ।
८ आठवाँ फिरिश्ता जवान ( जिह्वा ) है जो भला और बुरा वचन बोलने को सिखाता है ।
९ नवाँ फिरिश्ता आलातनासुल ( जननेन्द्रिय ) है जो मूत्र त्याग करने और संसारकी वृद्धि करने का मार्ग बतलाता है ।
१० दशवाँ फिरिश्ता मेकअद ( गुदेन्द्रिय ) है जो शरीर के मलों को बाहर निकालता है ।
११ ग्यारहवाँ फिरिश्ता दिल ( मन ) है जो इच्छा उत्पन्न करता है और राग द्वेष करता है । दिल वह नहीं है जिसको राक्षस मांसाहारी लोग कबाब बनाकर खाते हैं ।
१२ बारवाँ फिरिश्ता इद्राक ( चित ) है जो सर्व पदार्थोंका चिंतन करता है ।
१३ तेरहवाँ फिरिश्ता अहंकार है जो जीवन की रक्षा करता है ।
१४ चौदहवाँ फिरिश्ता अक्क ( ज्ञान ) है जिसे जिवरईल कहते हैं और जो सबके भेद को जानता है और सबको उप-युक्त मार्ग बतलाता है ।