कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
( ४९ )
साखी-गाकर कठी अगिनसे, मिश्री घूतहि मिलाय ॥ न्यामत धरी रिकाबमें, कुत्तासे कहे खाय ॥
बोपाई
कुत्ता न्यामत खाय न भाई । मार डुरवेश कुत्ता के ताई ॥ ऐसो चरित कीन दुर्वेश । तब शाहके मनमें भयो अंदेशा ॥
मुलतान बचन
कहे शाह तुम सुनो दिवाना । यह पशुजीव न्यामत कहजाना ॥
जिदा बचन
कहे फकीर सुनो बेनादाना । जैसा दिया तैसाही खाना ॥ जौसि करे करतूत कमाई । तैसि देह धरि भुगते भाई ॥ यामें फेर फार नहि होई । जो बोवे लुनिहे वह सोई ॥
मुलतान बचन
दोयकर जोरिके विन्ती कीन्हा । साहब तुमरी गति हम चीन्हा ॥ वानी अगम क.हो समझाई । आगे कौन हते यह साई ॥
दुर्वेश बचन
तब दुर्वेश कहे समझायी । सुनो शाह तुम मन चितलायी ॥ बलख शहर यक नगर रहाई । तहँके हैं यह दोनों राई ॥ इब्राहीम अहै यक राजा । एक बाप अरु दूजो आज्ञा ॥ राज पाय कछु भक्ति न कीना । ताते जन्म श्वान को लीना ॥
१ यहां जो शाह इब्राहीम अदम साहबके बाप दादेको बलखका बादशाह लिखा है यह बात इतिहास और विचार द्वारा एकदम निर्मूल ठहरता है, क्यों, कि बलखके बाद शाह इब्राहीमके बाप दादे नहीं थे बरन इसके उल्टा उनके पिता एक महान संत थे जो परम विरागमान और एकांतवास करने वाले थे । शाह इब्राहीमको उत्पत्तिको कथा बहुतही रोचक और आश्चर्य दायक है । यहां स्थानाभावसे नहीं वे सकता गुरुको कृपा होगी तो कबीर साहबके जीवन चरित्रके सहित मुलतान चरित्र भी बहुत स्वरूपमें लिखेंगे । यहां दोनों कुलों को बलख के बादशाह और शाह इब्राहीम अदमको बाप दादा बतलाना बहुत ही भूल है इस हेतुसे जाना जाता है कि, इस पुस्तकमें भी उत्तरोत्तर मिलावट होती गयी है और मिलावट करनेवाले भी साधारण