कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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मुल्तानबोध
उसकी गोदमें रख दिया । बेगमने जैसेही इब्राहीमको गौर करके देखा वैसेही लडकीकी शकल देखकर एकदम बेहोश होकर गिर पड़ी । फिर तो महलमें धूम मच गयी । बेगमको होशमें लानेके सैकड़ों उपाय किये गये । जब वह होशमें आयी तब इब्राहीमको गोदमें लेकर बार बार बलाई लेने और नाना प्रकार के संकल्प विकल्प मनमें करने लगी ।
गोदमें फिर उसको लेकर नागहाँ । साँस ठंडीभरके करती थी व्यों ॥ ऐ मेरे लखते जिगरके हम शबीह । ऐ मेरे नूरे बरसके हम शबीह ॥ ऐ मेरे रशके कमरके हमसिफत । ऐ मेरे गुल वर्गतरके हम सिफत ॥ ऐ मेरे उस गुलबदनके हम अनाँ । ऐ मेरे शीरी दहनके हमनिशाँ ॥ ऐ मेरे उस लाबुते चींके करीं । ऐ मेरे आहुये मिराकीके करीं ॥ ऐ मेरे ताबिन्दः अखतरकी शबीह । ऐ मेरे मेहरे मनौवर की शबीह ॥ ऐ मेरे नादीदः दुनियाके मिसाल । ऐ मेरे फरजन्द जेबाके मिसाल ॥ ऐ मेरे युसुकके हमतजाँतराश । ऐ मेरे लैलाके हमवज अवकमाश ॥ ऐ मेरे जाने जहाँके हम अनाँ । ऐ मेरे गुंचः देहाँके हम अनाँ ॥ ऐ मेरे उस मूकभरके हम कमरा । ऐ मेरे याकूत लबके हम गोहर ॥
देताहै हर जुज्व तेरा बे गुमाँ ।
युसुफे गुमगश्तः मेरे का निशाँ ॥
है जो हर हर जुज्व तेरा बिलएकीं ।
यादगार लैलीय महमल नशी ॥
इस प्रकार अनेक तरहसे बेटीका स्मरण कर लेनेके पश्चात् बेगम ने इब्राहीम से पूछा कि, तेरी माँ और बापका नाम क्या है ? इब्राहीमने बापका नाम अह्मशाह और माँका नाम वही बतलाया जो बादशाह की लडकीका नाम था ।
शाहकी दुखतरका जो कुछ नाम था । वही इब्राहीमने माँका लिया ॥