कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
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और बतायानामअद्दम बापका । दशतमें अपनीकहीरहनेको जा ॥
अद्दम शाहके नाम को बलख निवासी स्त्री पुरुष बच्चे से बूढे तक सभी जानते थे । क्यों कि वह शाहजादी पर आशिक था । और शाहजादीका मरजाना भी अद्दमशाहके ही शापका फल लगाना मान रखा था । यही कारण हैकि, अद्दमशाहको सब लोग महात्मा सिद्ध समझते थे । इब्राहीमके मुखसे बादशाह-जादी और अद्दम दोनोंका नाम सुनकर लोगोंको बड़ा आश्चर्य हुआ । बादशाह और बेगमके अन्तःकरणमें न जाने कितनी करुपनाएँ आती थीं और कितनी आशा और निराशा उनके चारों ओर फिर रही थीं । आखिर बादशाह बेगमने अपने हाथसे इब्राहीमको स्नान कराकर अच्छे २ कपडे पहनाया और उत्तम उत्तम पदार्थ उसे खानेको दिया । फिर बादशाह इब्राहीमको बेगमके पास छोड़कर अपने खानगी स्थानमें जा बैठा और इस भेद पर विचार करने लगा । अन्तमें बादशाहने निश्चय किया कि, अद्दमशाहसे इनका वृत्तान्त पूछना चाहिये वह संसार त्यागी फकीर है वह कदापि झूठ नहीं बोलेगा ।
बादशाहके दिलमें आया यों रुयाल ॥
पूछिये अद्दमसे उस दुखतर का हाल ॥
फर्कऊसकीरास्त गौरीमें नहीं । जो कहेगा वह सच्चहै बिल यकीं ॥ मर्द हकहै पाय बन्दे रास्ती । झूठ हर्गिज न बोलेगा कभी ॥
इतना विचार कर बादशाहने दरवान को बुलाकर हुकम दिया कि अगर कोई लड़का लेने आवे तो उसे द्वारपर मत रोकना बल्कि उसे सीधा मेरे पास पहुँचाना । उसको प्रतिष्ठापूर्वक ले आना, खबरदार उसके मनमें किसी प्रकारसे बुरा न लगने पावे इतना हुकम देकर बादशाह अद्दमशाहकी इन्तजारी करने लगा ।