कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 840, कुल 2136 में से
संदर्भ में पढ़ें( १०० )
सुलतानबोध
विशेष वृत्तान्त सुलतानबोधमें लिखा है । यद्यपि और और लिखने वालोंके विचार और लिखनेसे सुलतानबोधमें बहुत कुछ भेद पड़ता है तथापि सबका लक्ष एकही है और सबने अन्त में फल भी एकही दर्शाया है । इसकारण और यहाँ पुस्तक बढ जानेके भयसे अधिक न लिख कर शाह इब्राहीम अद्दमके फकीर हो जाने पश्चात् की करामात औ प्रचार की बातों में से थोडी सी बातें यहाँ लिखकर यह ग्रंथ समाप्त किया जायगा ।
शाहइब्राहीम अद्दम का स्फुट वृत्तान्त
वार्ता १
कहते हैं अद्दम हुए जिस दम फकीर । छोड सुलतानीका सब तांजो शरीर ॥ मालोजर जितना खजाने बीच था । लेके दरियामें दिया सारा जुबा ॥ पूछा एकने क्या किया यह ऐ मालिक । क्यों न हर एकको दिया यह ऐ मालिक ॥ दरजबांब उसको कहा यह मालोजर । याँदये बोगर्जब हसदें नखवैत का घर ॥ यों सुना है मैं बुजुंगोंसे कलाम । जानते हैं इस मिसलको खास व आम ॥ आप पर जो चीज होवे ना पसन्द । गैरेंपर उसको मत रखना पसंद ॥
१ बादशाही, राज्य । २ राजमुकुट । ३ राजसिंहासन । ४ धनदोलत । ५ बादशाह । ६ उत्तर में । ७ पूंजी । ८ कीना गुस्सा, क्रोध, आंटी । ९ ईर्षा । १० अभिमान । ११ बर्बोल । १२ हूसरा ।