कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
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बीतने पर उनके नानाका जिन्होंने अपना राज्य इन्हें देकर आप भजनके लिये एकान्त वास किया था देहान्त हो गया ।
नानाके मर जाने पर इब्राहीम शाहके मन पर बड़ा धक्का लगा उनका चित्त संसारसे एकदम वैराग्यको प्राप्त हुआ अब उन्हें दिन रात परलोक की चिन्ता रहने लगी ।
याने इब्राहीमशाहे दो जहाँ ॥ करता था जाहिरमें गो कारे शहाँ ॥ लैक था दुनियासे दिलबरदाशता ॥ बेवफा व बेबका पिन्दाशता ॥ कारदुनियाँस नथी चसपीदगी ॥ कुछ तहेदिलसे नथी गरवीदगी ॥ जानता था कार दुनियाँ सुस्तआर ॥ करता था बहरे जरूरत कारो बार ॥ मुल्करानी उसनेकी वबा आब ताब ॥ दसबरस वरलाह आलम बिलसवाब ॥ अदल अपने असिरमें ऐसा किया ॥ महो सुतलक होगया जौरो जफा ॥ शाम आपरवानेको देत कलीफ अगर ॥ किताजल्द उसका करे गुलगीर सर ॥ जुलमसे तोडे जो बुज ठत्री हरी ॥ फेर दे कस्साब गरदन पर छुरी ॥
इसके आगे नानाकी मृत्यु देखकर इब्राहीमशाहके हृदयमें विरागका अंकुर विशेष वृद्धिको प्राप्त हुआ और सदगुरुने जिस प्रकार उन्हें उपदेश देकर सत्य पदको प्राप्त कराया उसका