भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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शब्दावली

(१२९)

कहुरे ॥ १४ ॥ शाह सिकंदर सु अंदरमें लेखा । कैसा फकीरा य चहिये तो देखा ॥ कर बांध पग बांध बोरे सु दहुरे । कक्वीर कक्वीर कक्वीर कहुरे ॥१५॥ टूटे है जंजीर बैठे हैं तीरा ॥ बोला सो शाह यह सांचा फकीरा ॥ फिर बोल बोले कि गजमस्त अहुरे । कक्वीर कक्वीर कक्वीर० ॥ १६ ॥ मातंग माते न जाते ढिगे हैं । लख रूप सिंधे सु चिक्कार भगे हैं ॥ देशाह अजमत स्वामी सु बहुरे कक्वीर कक्वीरकक्वीर कहुरे ॥१७॥ देखो सबे काम करता खिजूका । भर तोप गोला सु रोपा बिजूका ॥ जिम देह गजतूल गोली न लहुरे । कक्वीर कक्वीर कक्वीर० ॥१८॥ है दीनबंधू दया देख अंदर । गत जौन जैसी सो नाचत सु बंदर ॥ तिय आप शाह सिकंदर जो चहुरे । कक्वीर कक्वीर कक्वीर० ॥ १९ ॥ फिर शाह बोला य गोला न डरपे । तेगे अनेगे चलाया है गरपे ॥ जल धार जिम सार मझि आय बहुरे । कक्वीर कक्वीर कक्वीर० ॥२०॥ कहांलो कहां और केतो कहानी । तजी स्वामि ऐसो भुलानोरे प्रानी ॥ निष्काम निष्कोध निरलोभ बहुरे । कक्वीर कक्वीर कक्वीर ॥२१॥ हारा है शाह सो दैऽनेक पीरा ॥ नाही फकीरा यह है आप पीरा ॥ जाना सो नरनाह सरनाह गहुरे । कक्वीर कक्वीर कक्वीर० ॥२२॥ खूने अनेक जो शाहूने कीन्हा । जानाजी अपने सु चितमें न दीन्हा ॥ जिमितात सुतकेर औगुण न गहुरे । कक्वीर कक्वीर कक्वीर० ॥२३॥ डारे सु सिरपेज ऐचे जु मूछे । का लेत । का लेत । बातें सो पूछे ॥ है स्वामि सबकेर सब माहीं बहुरे । कक्वीर कक्वीर कक्वीर० ॥२४॥ फिर एक औरि सुनोरे गुनोरे । तजि-स्वामि ऐसो न सीसे धुनोरे ॥ कहीं है पुरी आप काशीमें रहुरे । कक्वीर कक्वीर कक्वीर० ॥२५॥ गोपालपंडा सो अटका बनायो । फूटा है पटका सु चटका बुझायो ॥ काहू न ताको वो भेद लहुरे । कक्वीर कक्वीर

कवीरपंथी शब्दावली ५

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