कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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फैलाने, आपके सत्यराजकी महिमा प्रगट कर, अपनी तथा और दुखियोंकी आत्माको कालजालसे बचानेमें समर्थ होंवें। ऊँ शांतिः ! शांतिः !! शांतिः !!! ॥
सत्य कवीरोजयति ॥
निवेदन ।
यह गुरु सहस्रनाम लेखक महाशयोंकी कृपासे अबतक इस अवस्था को पहुँच गया है, जैसा आपके सम्मुख उपस्थित है । कितने कारणोंसे इसके शुद्ध करानेका अवसर नहीं मिला है । यदि कोई विद्वान महात्मागण इसको शुद्ध करके मेरे पास भेज देंगे, तो धन्यवाद पूर्वक इसकी दूसरी आवृत्ति फिरसे छपायी जायेगी ।
इसके अतिरिक्त कितने लोगोंने मुझसे कहा है कि , यदि गुरुसहस्रनामकी हिन्दी हो जावे और वह भी होवे कवितामें, तो संस्कृत न जाननेवाले जिज्ञासुओंका विशेष उपकार हो । इसलिये श्रीयुत शास्त्री विचारदासजी साहब, पण्डित ब्रह्मलीन दासजी, शास्त्री हंसदासजी तथा महंत लक्ष्मणदासजी गुरु श्रीमान् महंत तुरंतदासजी साहेब सुंगाना आदि विद्वानोंसे मेरा विनय है कि, आपलोगोंमेंसे जो महानुभाव इस गुरुसहस्रनामको शुद्धकरके, टीका और इसका हिन्दी कविता-बद्ध अनुवाद भेजनेकी कृपा करेंगे तो बड़ा उपकार करेंगे और मैं बड़े आनन्दके साथ उसे छपाकर प्रकाशित करदूंगा ।
भवदीय—
श्रीयुगलानन्द विहारी
कबीराश्रम खरसिया (विलासपुर सी०)