कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
पृष्ठ 220, कुल 968 में से
संदर्भ में पढ़ें(२१२)
कवीरपंथी—
श्रीगुरुचे नमः । अथ श्रीगुरु सहस्रनाम प्रारम्भः । न्यास प्रारम्भः ।
ॐ यस्य सद्गुरुदिव्यनामस्तोत्रमन्त्रस्य ॥ शिष्य ऋषिः ॥ मन्त्रछंदः ॥ गुरुदेवता ॥ सोहं बीजं ॥ अहं शक्तिः ॥ गुं अंगुष्ठाभ्यां नमः ॥ रुं तर्जनीभ्यां नमः ॥ वं मध्यमाभ्यां नमः ॥ नं अनामिकाभ्यां नमः ॥ मं केंनिष्ठिकाभ्यां नमः ॥ सं करंतल- करपुष्पाभ्यां नमः ॥ गुं हृदयाय नमः ॥ रुं शिरसे स्वाहा ॥ वैं शिखायैवषद् ॥ नैं कवचांयहुं ॥ मैं नेत्रत्रैयाय वौषद् ॥ सैं अंखाय फद् । गुरुं प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ।
श्लोक-ध्यान × ।
ध्यायेत सद्गुरुश्चेतरूपममलं श्वेतांबरं शोभितम् । कर्णैः कुण्डलश्चेतशुभ्रमुकुटम् हीरामणिमंडितम् ॥ नानामालमुक्तादि शोभितगलं, पद्मासने संस्थितम् । दयाविधधीरं सुप्रसन्न वदनम्
१ यह मंत्र पढ़कर दोनों हाथकी तर्जनी अंगुलीसे, दोनों हाथके अंगूठीको स्पर्श करते हैं । अंगूठे पास जो अंगुली है उसीक। नाम तर्जनी है ।
२ यह मंत्र पढ़कर दोनों अंगूठीसे तर्जनी अंगुलियोंका स्पर्श करते हैं ।
३ इस मंत्रको पढ़ता हुआ दोनों मध्यमा अंगुलियोंका स्पर्श करे ।
४ इसको पढ़कर दोनों अंगूठीसे अनामिकाको स्पर्श करे ।
५ इसको बोलता हुआ दोनों अंगूठीसे दो कनिष्ठिकाको स्पर्श करे ।
६ यह मन्त्र पढ़कर प्रथम दाहिने हाथके नीचे बाया हाथ रखे फिर बायें हाथके नीचे दाहिना हाथ रखे ।
७ यह मन्त्र पढ़कर पांचों अंगुलियोंसे हृदयका स्पर्श करते हैं ।
८ यह मन्त्र पढ़कर पांचों अंगुलियोंसे शिरका स्पर्श करते हैं ।
९ इस मन्त्रको बोलकर पांचों अंगुलियोंसे शिखाका स्पर्श करते हैं ।
१० यह मंत्र पढ़कर दाहिने हाथसे बायें खवे (कन्धे) का और बायें हाथसे दाहिने (खवे) कन्धे स्पर्श करते हैं ।
११ इसके द्वारा दाहिने हाथसे दोनों नेत्रोंको छूते हैं ।
१२ यह मंत्र पढ़कर दाहिने हाथकी तर्जनी और मध्यमासे बायें हाथकी हवेलीपर मारते हैं ।
१३ यह पढ़कर ऐसा संकल्प करे कि सद्गुरुके प्रसन्न होनेके निमित्त मैं यह पाठ करता हूँ ।
× इसके पश्चात् प्रथम और द्वितीय श्लोकमें लिखे अनुसार सद्गुरुके स्वरूपका मानसिक ध्यान करे और सहस्रनामों द्वारा सद्गुरुकी विभूतिका चिन्तन करता हुआ पाठ करे ।
उपरोक्त करण्यास अंगन्यास तथा ध्यानकी विधि गुप्तसे सीखना चाहिये ।