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कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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(२१२)

कवीरपंथी—

श्रीगुरुचे नमः । अथ श्रीगुरु सहस्रनाम प्रारम्भः । न्यास प्रारम्भः ।

ॐ यस्य सद्गुरुदिव्यनामस्तोत्रमन्त्रस्य ॥ शिष्य ऋषिः ॥ मन्त्रछंदः ॥ गुरुदेवता ॥ सोहं बीजं ॥ अहं शक्तिः ॥ गुं अंगुष्ठाभ्यां नमः ॥ रुं तर्जनीभ्यां नमः ॥ वं मध्यमाभ्यां नमः ॥ नं अनामिकाभ्यां नमः ॥ मं केंनिष्ठिकाभ्यां नमः ॥ सं करंतल- करपुष्पाभ्यां नमः ॥ गुं हृदयाय नमः ॥ रुं शिरसे स्वाहा ॥ वैं शिखायैवषद् ॥ नैं कवचांयहुं ॥ मैं नेत्रत्रैयाय वौषद् ॥ सैं अंखाय फद् । गुरुं प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ।

श्लोक-ध्यान × ।

ध्यायेत सद्गुरुश्चेतरूपममलं श्वेतांबरं शोभितम् । कर्णैः कुण्डलश्चेतशुभ्रमुकुटम् हीरामणिमंडितम् ॥ नानामालमुक्तादि शोभितगलं, पद्मासने संस्थितम् । दयाविधधीरं सुप्रसन्न वदनम्

१ यह मंत्र पढ़कर दोनों हाथकी तर्जनी अंगुलीसे, दोनों हाथके अंगूठीको स्पर्श करते हैं । अंगूठे पास जो अंगुली है उसीक। नाम तर्जनी है ।

२ यह मंत्र पढ़कर दोनों अंगूठीसे तर्जनी अंगुलियोंका स्पर्श करते हैं ।

३ इस मंत्रको पढ़ता हुआ दोनों मध्यमा अंगुलियोंका स्पर्श करे ।

४ इसको पढ़कर दोनों अंगूठीसे अनामिकाको स्पर्श करे ।

५ इसको बोलता हुआ दोनों अंगूठीसे दो कनिष्ठिकाको स्पर्श करे ।

६ यह मन्त्र पढ़कर प्रथम दाहिने हाथके नीचे बाया हाथ रखे फिर बायें हाथके नीचे दाहिना हाथ रखे ।

७ यह मन्त्र पढ़कर पांचों अंगुलियोंसे हृदयका स्पर्श करते हैं ।

८ यह मन्त्र पढ़कर पांचों अंगुलियोंसे शिरका स्पर्श करते हैं ।

९ इस मन्त्रको बोलकर पांचों अंगुलियोंसे शिखाका स्पर्श करते हैं ।

१० यह मंत्र पढ़कर दाहिने हाथसे बायें खवे (कन्धे) का और बायें हाथसे दाहिने (खवे) कन्धे स्पर्श करते हैं ।

११ इसके द्वारा दाहिने हाथसे दोनों नेत्रोंको छूते हैं ।

१२ यह मंत्र पढ़कर दाहिने हाथकी तर्जनी और मध्यमासे बायें हाथकी हवेलीपर मारते हैं ।

१३ यह पढ़कर ऐसा संकल्प करे कि सद्गुरुके प्रसन्न होनेके निमित्त मैं यह पाठ करता हूँ ।

× इसके पश्चात् प्रथम और द्वितीय श्लोकमें लिखे अनुसार सद्गुरुके स्वरूपका मानसिक ध्यान करे और सहस्रनामों द्वारा सद्गुरुकी विभूतिका चिन्तन करता हुआ पाठ करे ।

उपरोक्त करण्यास अंगन्यास तथा ध्यानकी विधि गुप्तसे सीखना चाहिये ।