भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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शब्दावली

(२३१)

ऋषीश्वरोंका वचन

रामानन्दजी वचन (रामानन्दगोष्ठीसे)

कर्ता तुम ही साधु हो, सत कवीर हो देव । तनमन तुमको अरपिहौं, कुलदिशा मोहि देव ॥

धर्मदास वचन ।

बाजा बाजे रहितका, परा नगरमें झोर । सद्गुरु खसम कवीर है, नजर न आवे और ॥

गोरखनाथ वचन ॥

नौनाथ चौरासी सिद्ध, इनका अनहद ज्ञान । अविचल घर कबीरका, यह गति विरला जान ॥ झोरी झण्डा कूबरी, सेली टोपी साथ । दया भइ जब कवीरकी, चढायी गोरखनाथ ॥

नाभाजी वचन ।

वानी अरब व खरब हैं, ग्रंथों कोट हजार । कर्ता पुरुष कवीर है, नामे किया विचार ॥

नानकसाह वचन राग महलापहला । ×

यक अर्ज गुफतम पेश तू दर गोश कुन करतार । हक्का कवीर करीम तू ऐब परवरदिगार ॥ दुनियाँ मुकाम फानी तहकीक दिलदानी । मन सर मूए इजराईल गिरफत दिल हेच न दानी ॥ जन पिसर बेरादर कस नेस्त दस्तम गीर । आखिर बयफतम कस नदारम चैशन्द तकबीर ॥ शबोरोज गशतम दरहवा करदेम बदी खयाल । गाहे न नेकी कार करदम ई चुनी अहवाल ॥ बदबरक्त हमचू बखील गाफिल बेनजर बेबाक । नानक बगोयद जी तोरा तिरा चाकरा पाखाक ॥

मल्लकवासजी वचन शब्द ।

जपोरे भाई साहब नाम कवीर । एक समय गुरु बंसी बजाई,

× नोट-इसका अर्थ परिशिष्ट में देखो ॥