कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
पृष्ठ 241, कुल 968 में से
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ऋषीश्वरोंका वचन
रामानन्दजी वचन (रामानन्दगोष्ठीसे)
कर्ता तुम ही साधु हो, सत कवीर हो देव । तनमन तुमको अरपिहौं, कुलदिशा मोहि देव ॥
धर्मदास वचन ।
बाजा बाजे रहितका, परा नगरमें झोर । सद्गुरु खसम कवीर है, नजर न आवे और ॥
गोरखनाथ वचन ॥
नौनाथ चौरासी सिद्ध, इनका अनहद ज्ञान । अविचल घर कबीरका, यह गति विरला जान ॥ झोरी झण्डा कूबरी, सेली टोपी साथ । दया भइ जब कवीरकी, चढायी गोरखनाथ ॥
नाभाजी वचन ।
वानी अरब व खरब हैं, ग्रंथों कोट हजार । कर्ता पुरुष कवीर है, नामे किया विचार ॥
नानकसाह वचन राग महलापहला । ×
यक अर्ज गुफतम पेश तू दर गोश कुन करतार । हक्का कवीर करीम तू ऐब परवरदिगार ॥ दुनियाँ मुकाम फानी तहकीक दिलदानी । मन सर मूए इजराईल गिरफत दिल हेच न दानी ॥ जन पिसर बेरादर कस नेस्त दस्तम गीर । आखिर बयफतम कस नदारम चैशन्द तकबीर ॥ शबोरोज गशतम दरहवा करदेम बदी खयाल । गाहे न नेकी कार करदम ई चुनी अहवाल ॥ बदबरक्त हमचू बखील गाफिल बेनजर बेबाक । नानक बगोयद जी तोरा तिरा चाकरा पाखाक ॥
मल्लकवासजी वचन शब्द ।
जपोरे भाई साहब नाम कवीर । एक समय गुरु बंसी बजाई,
× नोट-इसका अर्थ परिशिष्ट में देखो ॥