भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

पृष्ठ 249, कुल 968 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 249

शब्दावली

(२३९)

प्राणायाम करि, जीता सकल शरीर । तिरवेणीके घाटमें, अटक रहै बलबीर ॥ २१ ॥ तीरथ वरत इकादशी, गंगोदक अस्नान । पूजा विधि विधानसो, सर्व कलासों गान ॥ २२ ॥ करे मानसी सेव नित, आत्मतत्त्वको ध्यान । षट पूजा आदि भेद गति, धूप औ दीप विधान ॥ २३ ॥ चौदह सौ चेले किये, काशीनगर मैझार । चार सम्प्रदा चलत हैं, औरो बावन द्वार ॥ २४ ॥ पांच बरसके जब भये, काशी माहिं कवीर । दास गरीब अजीब कला, ज्ञान ध्यान गुण थीर ॥ २५ ॥ गुल काशीपुरिमें भया, अटपट वैन विहंग । दास गरीब गुणी थके, सुनि जोलहा परसंग ॥ २६ ॥ रामानन्द अधिकार है, सुनि जोलहा जगदीश । दास गरीब विलंबना, ताहि नवावत शीश ॥ २७ ॥ रामानन्दको गुरु कहै, तनसे नहीं मिलाय । दास गरीब दरस भये, पैयन लगी जो लाय ॥ २८ ॥ पन्थ चलत ठोकर लगे, राम नाम कहि दीन । दास गरीब कसर नहीं, सीख लिये परवीन ॥ २९ ॥ आडा परदा देइके, रामानन्द बुझन्त । दास गरीब उलंग छबि, अधर डाक कूदन्त ॥ ३० ॥ कौन जाति कुल पन्थ है, कौन तुम्हारा नाउँ । दास गरीब अधीन गति, बोलतही बलि जाउँ ॥ ३१ ॥ जाति हमारी जगदगुरु, परमेश्वर पद पन्थ । दास गरीब लिखत परे, नाम निरञ्जन कन्थ ॥ ३२ ॥ रे बालक दुर्बुद्धि सुनु, घट मठ तन आकार । दास गरीब दर दर लगे, बोले सिरजनहार ॥ ३३ ॥ तू मोमिनके पालुवा, जुलहेके घर बास । दास गरीब अज्ञान गति, एता हठ विश्वास ॥ ३४ ॥ मान बढाई छाड़िके, बोलौ बालक बैन । दास गरीब अधम सुखी, इतना तुम घर फैन ॥ ३५ ॥ कलियुग क्षेतरपाल है, क्या भैरो कोई भूत । दास गरीब विडंबना, गया जगत सब ऊत ॥ ३६ ॥ मनी मगज माया तजो, तजिये मान गुमान । दास गरीब सो बात कहि