भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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शब्दावली

(२५१)

और नालायक व नादार। तु सब लायक है खाली पूर करदे ॥ हमारे बद अमल पर मत नजर कर। सरन और नाम अपनेका अजरदे ॥ बहुत दिनका सगे दर हूँ मैं तेरा। न दुर दुर कर न दुर कर पेट भरदे ॥ ना जाऊँ दर बदर इक दरे उम्मीद। बचाले जान और जिवदान बरदे। मिहरकी बहर तू बेहद न पायान। मिहर कीजे मिहर कीजे अपनी लहरदे ॥ सगे दरको फिरा हरगिज न दर दर। मिहर कीजे मिहर कीजे मिहरकर॥१॥

तुही कुनसे किया कूनों मकाँको। तुही बरपा किया सब जिस्म व जाँको ॥ तुही सतपुर्ण ज्ञानी नाम तेरा। तुही बतला दिया नामे निशाँको ॥ किया तुहीने मलकुल मौत पैदा। तुही भेजा है सुरशिव मिहवाँको ॥ कहरेके वास्ते कर काल ज्वार। मिहर कर फिर किया अमनो अमाँको ॥ बनजमे इस जहाँ निर- गुन बनाना। किया पैदा हरी हर वेदरुवाँको। किय मकबूल और मकरुह व मरदूद। तुही खूबी दिया जन्नत जनाँको ॥ तेरे सब नाम हैं आराम बरुशें। वले सब वरुफ सतनाम सुबहाँको ॥ तेरे औसाफ लायक न मलायक। है क्या इमकान इन्साँकी जबाँको ॥ न जाना भेद कुछ हम्दे सरायां। बयों किस तौर कीजे लाबयाँको ॥ तुही बेमिस्ल साहब सबका सरदार। तुही बरुशे अद् और दोस्ताँको ॥ अलख तुही है कोई लख न पाया। ना जाने भेद तुझ राजे निहाँको ॥ तुही सब कुछ किया है सबमें मौजूद। तुही देता है हरकस हर जमाँको ॥ बहर खानो बहर शानो बहरशे। तुही था और तुही होगा तुही है ॥ २ ॥

हजारों पीर गैगाँबर बनाये। जुदा सब मजहबो मिह्वत चलाये ॥ नहीं वह नूर सद मासूर तारे। मिहर तुझ रुख मिहर दैजूर जाये ॥ नहीं लमअ सौसद शमअ शविस्तां। कि बरकत