भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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( ३६४ )

कवीरपंथी—

नहीं है दोष कुछ तेग, हुआ जो होरहा होगा। ये सुखदुख सबको कर्मकी, कंमाई है कृपासिन्धू ॥ विना भक्तीसे जो कवीर, तारे हैं कई पापी। इसीसे जगत्में तेरी, बड़ाई है कृपासिन्धू ॥ २ ॥

गजल ६वनि जंगला.

वो जो गर्भमें दुख था जबैर, तुझे याद हो कि, न याद हो। आया था तब तूँ कौलकर, तुझे याद हो कि न याद हो ॥ टे० ॥ मलमूत्रसे तौ शरीर सब, लिपटा हुआ दुरगन्धमें। जठराग्निसे जलनेका डर, तुझे याद हो कि न याद हो। उलटा टेंगा अति कष्टसे, नीचा किये शिर पैरमें। रोता था हरदम आंख भर, तुझे याद हो कि न याद हो ॥ इस दुखसे काटौ सुझे, हरगिज न भूलूँगा मैं तुझे। कहता था होहोके बेखबैर, तुझे याद हो कि न याद हो ॥ नव मास रक्षा की प्रभू, फिर गर्भसे बाहेर किया। बलहीन बालक बेखबैर, तुझे याद हो कि न याद हो ॥ फिर दूधसे पालन किया हो, ज्वान मायामें फँसा। फिरने लगा तूँ इधर उधर, तुझे याद हो कि न याद हो ॥ कपडे अभूषण पहनकर, चलनेमें देखै छाँहको। मोहित हुवा लखि नारि पर, तुझे याद हो कि न याद हो ॥ रहकर जवानी कुछ दिनों, आते बुढापा देख कर। कँपने लगा शिर सर्बैसर, तुझे याद हो कि न याद हो ॥ अब भी तो मूरख चेत तूँ, तीनों ये पन योही गये। कवीर कहते हैं अंगर, तुझे याद हो कि न याद हो ॥ १ ॥

गजल ६वनि जिला.

तजि सकल तर्दवीर, एक कवीरको ध्याया करो। होके दीन अधीन सन्तोंके, निकट आया करो ॥ टे० ॥ फूल फल परसाद, थोडा बहुत श्रद्धाके सहित। बन सके जो कुछ सो, उनकी भेटको लाया करो ॥ धरके सन्मुख उनके, अपने हाथ दोनों जोड़कर।

१ फल प्राप्ति. २ कठिन. ३ स्मरण. ४ अवैर्य. ५ अज्ञान. ६ साक्षात्. ७ यवि. ८ प्रयत्न ९ पास.