कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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(४२१)
शैव कौन ?
सो शैव जो शिवोऽहम गावे । जीव शीवको भेद मिटावे ॥ छाड़ि अमंगल मंगल रांचे । रहिअ जांच कबहुँ नहिं जांचे ॥२१॥
वैष्णव कौन ?
वैष्णव सोई जो व्यापक जाने । भक्त भगवंत एक करि माने ॥ दया क्षमा उर धरे विचारू । एक दोयका करे निवारू ॥२२॥
कर्म कौन ?
कर्मो सोई जो कर्म कमावे । अकरम छोड़ि सुकरम को धावे । पाप पुण्यकी आस बहाई । एक नाम रहै लवलार्ह ॥२३॥
उपासक कौन ?
इष्ट देवको निकटहिं जाने । रहे सदा सन्मुख मनमाने ॥ उपास्य देवको धरे ध्याना । सद्गुरु दया होय निर्वाना ॥२४॥
ज्ञानी कौन ?
ज्ञानी सोई जो ज्ञेय पहिचाने । आत्मम ब्रह्म एक करि जाने ॥ द्वैत भावको देह उड़ाई । कहैं कवीर ज्ञानी सतभाई ॥२५॥
पंथी कौन ?
पंथी होय सुपंथहि चाले । छाँडे पथ न कुपथ पग डाले । सद्गुरु बचन सदा मन आने । वेद संत सोइ पंथ बखाने ॥२६॥
गृही कौन ?
गिरही होय गिरहको जाने । पांच तत्व गुण तीन पिछाने । करि पिछान न्यारा होय जाई । आत्मतत्वमें रहे समाई ॥२७॥
वैद्य कौन ?
वैद्य सोई जो नाड़ि पिछाने । रोग अरोगका भेद बखाने । पात्र कुपात्रका करे विचारा । औषध नाम करे परचारा ॥२८॥
मंत्री कौन ?
मंत्री सोई जो मंत्र विचारे । राज काजको भले सँझारे । रय्यत राजा बसि करि राखे । नाम सुधारस निसि दिन चाखे ॥२९॥